Friday, 19 December 2025

बरमूडा ट्राय एंगल

बरमूडा ट्रायएंगल समंदर का एक ऐसा रहस्यमय जाल है, जिसके बारे में सुनते ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं। क्या आप जानते हैं कि अटलांटिक महासागर में एक ऐसा इलाका है जहाँ जहाज़ और हवाई जहाज़ अचानक गायब हो जाते हैं। इस जगह को बरमूडा ट्रायएंगल कहा जाता है, जो फ्लोरिडा, बरमूडा और प्यूर्टो रिको के बीच स्थित है।


पिछले कई सालों से यहाँ ऐसी घटनाएं हुई हैं जो किसी जासूसी या थ्रिलर फिल्म से कम नहीं लगतीं। कोई जहाज़ निकला और फिर उसका कभी कोई पता नहीं चला। कोई हवाई जहाज़ उड़ा और फिर हमेशा के लिए इतिहास बन गया।


लेकिन सवाल वही है। आखिर क्यों।


कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि इसके पीछे हैं रोग वेव्स, यानी अचानक उठने वाली बेहद विशाल समुद्री लहरें। ये लहरें इतनी ऊँची होती हैं कि पूरे जहाज़ को एक ही झटके में निगल सकती हैं, और वो भी बिना कोई निशान छोड़े।


काफी समय तक ऐसा माना जाता था कि ये लहरें सिर्फ कल्पना हैं। लेकिन बाद में सेटेलाइट से मिले सबूतों ने साबित कर दिया कि रोग वेव्स सच में होती हैं। और बरमूडा ट्रायएंगल, जहाँ मौसम अक्सर खराब रहता है और समुद्री धाराएं आपस में टकराती हैं, वहाँ ऐसी लहरों का बनना पूरी तरह संभव है।


तो हो सकता है कि ये रहस्यमय गायबियाँ किसी भूत प्रेत या एलियन की वजह से नहीं, बल्कि प्रकृति की बेरहम ताकत की वजह से हो रही हों। फिर भी कुछ सवाल आज भी अनसुलझे हैं।


बरमूडा ट्रायएंगल वो समंदर का रहस्यमयी जाल है जो सदियों से इंसानों को अपनी गिरफ्त में जकड़ता आ रहा है। अटलांटिक महासागर में फ्लोरिडा, बरमूडा द्वीप और प्यूर्टो रिको के बीच फैला ये त्रिकोणीय इलाका, जहाँ जहाज़ और हवाई जहाज़ ऐसे गायब होते हैं जैसे कोई अदृश्य ताकत उन्हें निगल गई हो।


बरमूडा ट्रायएंगल का नाम खास तौर पर 1950 से 1960 के दशक में मशहूर हुआ, जब लेखकों और मीडिया ने इसे डेविल्स ट्रायएंगल कहना शुरू किया। लेकिन इसकी कहानियां इससे भी कहीं पुरानी हैं।


1492 में क्रिस्टोफर कोलंबस ने अपनी समुद्री यात्रा के दौरान यहाँ अजीब घटनाएं दर्ज की थीं। उन्होंने लिखा कि कम्पास अजीब तरह से घूम रहा था और समंदर में रहस्यमयी चमकती रोशनियाँ दिखाई दे रही थीं।


20वीं सदी में ये रहस्य और भी गहरा हो गया।


1945 में फ्लाइट 19 नाम का अमेरिकी नेवी का ट्रेनिंग मिशन निकला। 5 बॉम्बर प्लेन आसमान में थे। रेडियो पर पायलट की आवाज़ आई कि हमारा कम्पास खराब हो गया है और सब कुछ अजीब लग रहा है। इसके बाद वो कभी नहीं मिले।


अगले दिन उन्हें खोजने गया सर्च प्लेन भी गायब हो गया। कुल 14 क्रू मेंबर्स और 13 सर्चर्स। कुल 27 लोग। जैसे हवा में विलीन हो गए।


1918 में USS साइक्लॉप्स नाम का विशाल जहाज़ 306 लोगों के साथ कोयला लेकर निकला। ना कोई SOS सिग्नल मिला, ना कोई मलबा। ये बरमूडा ट्रायएंगल की सबसे बड़ी और रहस्यमयी गुमशुदगी मानी जाती है।


1800 से अब तक 50 से ज्यादा जहाज़ और 20 से ज्यादा हवाई जहाज़ों के गायब होने की बातें दर्ज की जा चुकी हैं। 1967 में विचक्राफ्ट नाम की एक यॉट का सिर्फ 1 लाइफ जैकेट मिला। 1991 में एक इटालियन जहाज़ ने रेडियो पर कहा कि हमारे साथ कुछ भयानक हो रहा है, और फिर सब शांत हो गया।


इसके पीछे सिर्फ रोग वेव्स ही नहीं, और भी कारण बताए जाते हैं।


समंदर की गहराई में मौजूद मीथेन गैस के बुलबुले जब अचानक बाहर निकलते हैं, तो पानी का घनत्व कम हो जाता है। ऐसे में जहाज़ ऐसे डूब जाते हैं जैसे किसी दलदल में फंस गए हों। ये गैस हवाई जहाज़ के इंजन को भी प्रभावित कर सकती है। ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिकों ने इसे प्रयोगशाला में सिमुलेट करके भी दिखाया है।


इस इलाके में मैग्नेटिक गड़बड़ी की भी बातें सामने आई हैं। कम्पास कई बार सही दिशा नहीं दिखाते। यहाँ पृथ्वी की एक खास मैग्नेटिक लाइन गुजरती है, जिसे एगॉनिक लाइन कहा जाता है। अगर पायलट या कैप्टन सतर्क न हो, तो रास्ता भटकना तय है।


इसके अलावा तेज तूफान, घना कोहरा, गल्फ स्ट्रीम जैसी शक्तिशाली समुद्री धाराएं और इंसानी गलतियां भी हादसों की बड़ी वजह मानी जाती हैं। ये इलाका दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री और हवाई रास्तों में से एक है।


कुछ लोग अब भी एटलांटिस, रहस्यमयी ऊर्जा या UFO किडनैपिंग जैसी थ्योरीज़ पर यकीन करते हैं। चार्ल्स बर्लिट्ज की किताब ने इन कहानियों को और मशहूर किया। लेकिन ज़्यादातर वैज्ञानिक इन्हें कल्पना मानते हैं।


US कोस्ट गार्ड और इंश्योरेंस कंपनियों के मुताबिक, इस इलाके में हादसों की दर दुनिया के दूसरे समुद्री इलाकों से ज्यादा नहीं है। 2020 में SS Cotopaxi का मलबा मिला, जो 1925 में गायब हुआ था, लेकिन वो बरमूडा ट्रायएंगल के बाहर था।


तो शायद बरमूडा ट्रायएंगल कोई भूतिया जगह नहीं, बल्कि प्रकृति का एक खौफनाक लेकिन असली खेल है।


फिर भी समंदर का ये इलाका आज भी इंसान को सोचने पर मजबूर कर देता है।


रहस्य कुछ हद तक सुलझा है।

लेकिन रोमांच अब भी ज़िंदा है।

Friday, 12 December 2025

दीप जलाने की अनुमति पर बात

 

कैसे अदालतें हमें न्याय देंगी…?

कौन-सा जज हमारे पक्ष में खड़ा होगा…?


हम इतने कमजोर कब हो गए कि हिंदुओं को दीप जलाने की अनुमति देने वाले जज के खिलाफ महाभियोग लाया जा रहा है, और हम चुप बैठे हैं?


ना शोसल मिडिया पर पोस्ट कर रहे हैं…

ना किसी की पोस्ट को लाइक-रीट्वीट-कमेंट करके उसका साथ दे पा रहे हैं।


आवाज़ भी नहीं उठा पा रहे,

और जो उठा रहे हैं, हम उनके साथ भी खड़े नहीं हो पा रहे।


न्यायमूर्ति जी. आर. स्वामीनाथन पर विपक्ष का महाभियोग प्रस्ताव कई गंभीर सवाल खड़ा करता है।


सिर्फ सात साल में 64,700 से अधिक फैसले देने वाले, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहे गए न्यायाधीश पर अचानक “विचारधारा-प्रेरित” होने का आरोप, क्या यह सिर्फ संयोग है? या फिर विपक्ष की नीयत में ही खोट है?


असल विवाद थिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी पर कार्तिगई दीपम जलाने की अनुमति को लेकर था। सरकार और अदालत का मतभेद, पर विपक्ष ने इसे राजनीतिक लड़ाई में बदल दियाक्या एक धार्मिक परंपरा को निभाने की अनुमति देना इतना बड़ा अपराध है कि जज को संसद में घसीटा जाए?


या फिर विपक्ष अपनी कमजोर होती राजनीतिक ज़मीन को बचाने के लिए न्यायपालिका पर दबाव बनाने में लगा है?

Sunday, 23 November 2025

नल दमयंती प्रेम कथा

 *_नल-दमयंती कथा (Nal Damyanti Katha)_*

   

महाभारत महाकाव्य, में एक प्रसंग के अनुसार नल और दमयन्ती की कथा महाराज युधिष्ठिर को सुनाई गई थी।युधिष्ठिर को जुए में अपना सब-कुछ गँवा कर अपने भाइयों के साथ 12 वर्ष के वनवास तथा एक वर्ष के अग्यातवास पर जाना पड़ा। इस वनवास के समय धर्मराज युधिष्ठिर के आग्रह करने पर महर्षि बृहदश्व ने नल-दमयन्ती की कथा सुनाई।


निषाद देश में वीरसेन के पुत्र नल नाम के एक राजा हो चुके हैं। वे बड़े गुणवान्, परम सुन्दर, सत्यवादी, जितेन्द्रिय, सबके प्रिय, वेदज्ञ एवं ब्राह्मणभक्त थे, उनकी सेना बहुत बड़ी थी।। वे स्वयं अस्त्रविद्या में बहुत निपुण थे। वे वीर, योद्धा, उदार और प्रबल पराक्रमी भी थे।


उन्हीं दिनों विदर्भ देश में भीष्मक नाम के एक राजा राज्य करते थे। उन्होंने दमन ऋषि को प्रसन्न करके उनके वरदान से चार संतानें प्राप्त की, तीन पुत्र दम, दान्त, और दमन एवं एक दमयन्ती नाम की कन्या। दमयन्ती लक्ष्मी के समान रूपवती थी।


निषध देश से जो लोग विदर्भ देश में आते थे, वे महाराज नल के गुणों की प्रशंसा करते थे। यह प्रशंसा दमयन्ती के कानों तक भी पहुँची थी। इसी तरह विदर्भ देश से आने वाले लोग राजकुमारी के रूप और गुणों की चर्चा महाराज नल के समक्ष करते। इसका परिणाम यह हुआ कि नल और दमयन्ती एक-दूसरे के प्रति आकर्षित होते गये।


दमयन्ती का स्वयंवर हुआ। जिसमें न केवल धरती के राजा, बल्कि देवता भी आ गए। नल भी स्वयंवर में जा रहा था। देवताओं ने उसे रोककर कहा कि वो स्वयंवर में न जाए। उन्हें यह बात पहले से पता थी कि दमयंती नल को ही चुनेगी।


सभी देवताओं ने भी नल का रूप धर लिया। स्वयंवर में एक साथ कई नल खड़े थे। सभी परेशान थे कि असली नल कौन होगा। लेकिन दमयंती जरा भी विचलित नहीं हुई, उसने आंखों से ही असली नल को पहचान लिया। सारे देवताओं ने भी उनका अभिवादन किया। इस तरह आंखों में झलकते भावों से ही दमयंती ने असली नल को पहचानकर अपना जीवनसाथी चुन लिया।


नव-दम्पत्ति को देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त हु्आ। दमयन्ती निषध-नरेश राजा नल की महारानी बनी। दोनों बड़े सुख से समय बिताने लगे। दमयन्ती पतिव्रताओं में शिरोमणि थी। अभिमान तो उसे कभी छू भी न सकता था। समयानुसार दमयन्ती के गर्भ से एक पुत्र और एक कन्या का जन्म हुआ। दोनों बच्चे माता-पिता के अनुरूप ही सुन्दर रूप और गुणसे सम्पन्न थे समय सदा एक सा नहीं रहता, दुःख-सुख का चक्र निरन्तर चलता ही रहता है।


वैसे तो महाराज नल गुणवान्, धर्मात्मा तथा पुण्यस्लोक थे, किन्तु उनमें एक दोष था, जुए का व्यसन। नल के एक भाई का नाम पुष्कर था। वह नल से अलग रहता था। उसने उन्हें जुए के लिए आमन्त्रित किया। खेल आरम्भ हुआ। भाग्य प्रतिकूल था। नल हारने लगे, सोना, चाँदी, रथ, राजपाट सब हाथ से निकल गया। महारानी दमयन्ती ने प्रतिकूल समय जानकर अपने दोनों बच्चों को विदर्भ देशकी राजधानी कुण्डिनपुर भेज दिया।


इधर नल जुए में अपना सर्वस्व हार गये।। उन्होंने अपने शरीर के सारे वस्त्राभूषण उतार दिये। केवल एक वस्त्र पहनकर नगर से बाहर निकले। दमयन्ती ने भी मात्र एक साड़ी में पति का अनुसरण किया।


एक दिन राजा नल ने सोने के पंख वाले कुछ पक्षी देखे। राजा नल ने सोचा, यदि इन्हें पकड़ लिया जाय तो इनको बेचकर निर्वाह करने के लिए कुछ धन कमाया जा सकता है। ऐसा विचारकर उन्होंने अपने पहनने का वस्त्र खोलकर पक्षियों पर फेंका। पक्षी वह वस्त्र लेकर उड़ गये।


अब राजा नल के पास तन ढकने के लिए भी कोई वस्त्र न रह गया। नल अपनी अपेक्षा दमयन्ती के दुःख से अधिक व्याकुल थे। एक दिन दोनों जंगल में एक वृक्ष के नीचे एक ही वस्त्र से तन छिपाये पड़े थे। दमयन्ती को थकावट के कारण नींद आ गयी। राजा नल ने सोचा, दमयन्ती को मेरे कारण बड़ा दुःख सहन करना पड़ रहा है। यदि मैं इसे इसी अवस्था में यहीं छोड़कर चल दूँ तो यह किसी तरह अपने पिताके पास पहुँच जायगी।


यह विचारकर उन्होंने तलवार से उसकी आधी साड़ी को काट लिया और उसी से अपना तन ढककर तथा दमयन्ती को उसी अवस्था में छोड़ कर वे चल दिये।


जब दमयन्ती की नींद टूटी तो बेचारी अपने को अकेला पाकर करुण विलाप करने लगी। भूख और प्यास से व्याकुल होकर वह अचानक अजगर के पास चली गयी और अजगर उसे निगलने लगा। दमयन्ती की चीख सुनकर एक व्याध ने उसे अजगर का ग्रास होने से बचाया। किंतु व्याध स्वभाव से दुष्ट था। उसने दमयन्ती के सौन्दर्य पर मुग्ध होकर उसे अपनी काम-पिपासा का शिकार बनाना चाहा।


दमयन्ती उसे शाप देते हुए बोली: यदि मैंने अपने पति राजा नल को छोड़कर किसी अन्य पुरुष का चिन्तन किया हो तो इस पापी व्याध के जीवन का अभी अन्त हो जाय।


दमयन्ती की बात पूरी होते ही व्याध के प्राण-पखेरू उड़ गये। दैवयोग से भटकते हुए दमयन्ती एक दिन चेदिनरेश सुबाहु के पास और उसके बाद अपने पिता के पास पहुँच गयी। अंततः दमयन्ती के सतीत्व के प्रभाव से एक दिन महाराज नल के दुःखो का भी अन्त हुआ। दोनों का पुनर्मिलन हुआ और राजा नल को उनका राज्य भी वापस मिल गया।


राजा नल किसका पुत्र था?

नल निषध देश के राजा वीरसेन के पुत्र थे।


नल-दमयंती कथा कहाँ से ली गई है?

महाकाव्य महाभारत।


दमयंती के पिता का नाम क्या था?

विदर्भ देश के राजा भीष्मक की पुत्री थीं..!!

   *🙏🏻🙏🏽🙏🏾जय जय श्री राधे*🙏🏿🙏🙏🏼

Sunday, 16 November 2025

कमर दर्द , सरवाइकल और चारपाई...

 कमर दर्द , सरवाइकल और चारपाई....

Radhe radhe....

सोने के लिए खाट हमारे पूर्वजों की सर्वोत्तम खोज है। हमारे पूर्वजों को क्या लकड़ी को चीरना नहीं जानते थे ? वे भी लकड़ी चीरकर उसकी पट्टियाँ बनाकर डबल बेड बना सकते थे। डबल बेड बनाना कोई रॉकेट सायंस नहीं है। लकड़ी की पट्टियों में कीलें ही ठोंकनी होती हैं। चारपाई भी भले कोई सायंस नहीं है , लेकिन एक समझदारी है कि कैसे शरीर को अधिक आराम मिल सके। चारपाई बनाना एक कला है। उसे रस्सी से बुनना पड़ता है और उसमें दिमाग और श्रम लगता है।

जब हम सोते हैं , तब सिर और पांव के मुकाबले पेट को अधिक खून की जरूरत होती है ; क्योंकि रात हो या दोपहर में लोग अक्सर खाने के बाद ही सोते हैं। पेट को पाचनक्रिया के लिए अधिक खून की जरूरत होती है। इसलिए सोते समय चारपाई की जोली ही इस स्वास्थ का लाभ पहुंचा सकती है।


दुनिया में जितनी भी आरामकुर्सियां देख लें , सभी में चारपाई की तरह जोली बनाई जाती है। बच्चों का पुराना पालना सिर्फ कपडे की जोली का था , लकडी का सपाट बनाकर उसे भी बिगाड़ दिया गया है। चारपाई पर सोने से कमर और पीठ का दर्द का दर्द कभी नही होता है। दर्द होने पर चारपाई पर सोने की सलाह दी जाती है।

डबलबेड के नीचे अंधेरा होता है , उसमें रोग के कीटाणु पनपते हैं , वजन में भारी होता है तो रोज-रोज सफाई नहीं हो सकती। चारपाई को रोज सुबह खड़ा कर दिया जाता है और सफाई भी हो जाती है, सूरज का प्रकाश बहुत बढ़िया कीटनाशक है। खटिये को धूप में रखने से खटमल इत्यादि भी नहीं लगते हैं।


अगर किसी को डॉक्टर Bed Rest लिख देता है तो दो तीन दिन में उसको English Bed पर लेटने से Bed -Soar शुरू हो जाता है । भारतीय चारपाई ऐसे मरीजों के बहुत काम की होती है । चारपाई पर Bed Soar नहीं होता क्योकि इसमें से हवा आर पार होती रहती है ।

गर्मियों में इंग्लिश Bed गर्म हो जाता है इसलिए AC की अधिक जरुरत पड़ती है जबकि सनातन चारपाई पर नीचे से हवा लगने के कारण गर्मी बहुत कम लगती है ।

बान की चारपाई पर सोने से सारी रात Automatically सारे शारीर का Acupressure होता रहता है ।

गर्मी में छत पर चारपाई डालकर सोने का आनद ही और है। ताज़ी हवा , बदलता मोसम , तारों की छाव ,चन्द्रमा की शीतलता जीवन में उमंग भर देती है । हर घर में एक स्वदेशी बाण की बुनी हुई (प्लास्टिक की नहीं ) चारपाई होनी चाहिए ।

सस्ते प्लास्टिक की रस्सी और पट्टी आ गयी है , लेकिन वह सही नही है। स्वदेशी चारपाई के बदले हजारों रुपये की दवा और डॉक्टर का खर्च बचाया जा सकता है....radhe radhe....

Monday, 27 October 2025

હાસ્ય

😂😂😂😂😂😂😂


એક આદરણીય

સ્કૂલમાસ્ટર હમણાં જ નિવૃત્ત થયા હતા. 🎓

તે અને તેમની પત્ની

રાજકોટમાં એક ફ્લેટમાં રહેતા હતા. 🏠😉


દશેરા માટે, 

તેઓએ તેમના વતન જવાનું નક્કી કર્યું. 

💥🔥🔥🔥


જતા પહેલા,

માસ્ટરે મનમાં વિચાર્યું -

"આપણે બહાર હોઈએ ત્યારે,

જો કોઈ ચોર ઘરમાં ઘૂસી જાય તો શું?

તે ખુલ્લા કબાટ તોડી શકે છે અને બધે 

ગડબડ કરી શકે છે, ભલે ઘરમાં

પૈસા ન હોય!" 😅


તેથી, પોતાના ઘરને

તબાહીથી બચાવવા માટે,

તેણે ટેબલ પર ₹1000 મૂક્યા 💸

એક નોટ સાથે. 📝


---


"પ્રિય અજાણ્યો ચોર,


મારા ઘરમાં ઘૂસવા માટે

તમે જે પ્રયાસ કર્યો છે તેના માટે

હૃદયપૂર્વક અભિનંદન! 🥰🥰🥰


પરંતુ કમનસીબે,

હું એક મધ્યમ વર્ગનો માણસ છું,

માત્ર મારા પેન્શન પર જીવી રહ્યો છું. 😅

તેથી અહીં કંઈ મૂલ્યવાન નથી.


મને ખરાબ લાગે છે કે

તમારી મહેનત અને કિંમતી સમય

વ્યર્થ જશે. 😔 તો કૃપા કરીને, તમારા 

પ્રયત્નોના આદર તરીકે, મુકવામાં આવેલ

આ નાની રકમ સ્વીકારો. 🙏


ઉપરાંત, તમારા વ્યવસાયમાં

વધુ સફળ થવામાં મદદ કરવા માટે

(ચોરી 😜) કરવા બાબતે હું તમને નીચે 

કેટલીક ટિપ્સ આપી રહ્યો છું 👇"


---


માસ્ટરની "સલાહ"

નીચે મુજબ વાંચવામાં આવે છે: 😂👇


૮મા માળે - એક ભ્રષ્ટ મંત્રી રહે છે 💼💰


૭મા માળે - એક કુટિલ મિલકત વેપારી 🏢


છઠ્ઠા માળે - એક સહકારી બેંકના ચેરમેન 🏦


પાંચમા માળે - એક મોટા ઉદ્યોગપતિ 🏭


ચોથા માળે - એક પ્રખ્યાત વકીલ ⚖️


ત્રીજા માળે - એક ભ્રષ્ટ રાજકારણી 😏💍💵


"તેમની પાસે સોના અને રોકડના પર્વતો છે.


તમારી 'વ્યવસાયિક સફળતા'

તેમને સહેજ પણ પરેશાન નહીં કરે!


કારણ કે તેઓ પોલીસમાં

ફરિયાદ પણ નહીં કરે!" 😂😂😂


---


દશેરા પછી, જ્યારે

માસ્ટર ઘરે પાછા ફર્યા, 

ત્યારે તેમને ટેબલ પર એક

મોટી થેલી મળી. 🎒😲

તેની અંદર ₹૧૦ લાખ રોકડા હતા! 

💸💸💸

અને એક પત્ર —


---


"આદરણીય ગુરુજી, 🙏


તમારા માર્ગદર્શન અને

શિક્ષણ બદલ હૃદયપૂર્વક આભાર! 👏👏

મેં તમારી સલાહનું પાલન કર્યું અને મારું 

મિશન સફળ થયું! 😄

હું કૃતજ્ઞતાના પ્રતીક તરીકે

આ નાની રકમ છોડી રહ્યો છું.


ભવિષ્યમાં પણ મને

તમારા આશીર્વાદ અને શાણપણ

મળતું રહે એવી પ્રાર્થના...


તમારો શિષ્ય - ચોર 😄😄"


--


😂😂😂

ગુરુજીએ તે વાંચ્યું અને હસીને કહ્યું —


"અરે! મને લાગ્યું કે હું નિવૃત્ત થઈ ગયો છું,

પણ એવું લાગે છે કે મારી શિક્ષણ કારકિર્દી 

હજુ પણ ચાલુ છે!" 📚🤣💥


😂😂😂😂😂😂

😂😂😂😂😂😂😃😄

Friday, 24 October 2025

देवदूत

टालस्टाय ने एक छोटी सी कहानी लिखी है। मृत्यु के देवता ने अपने एक दूत को भेजा पृथ्वी पर। एक स्त्री मर गयी थी, उसकी आत्मा को लाना था। 


देवदूत आया, लेकिन चिंता में पड़ गया। क्योंकि तीन छोटी-छोटी लड़कियां जुड़वां–एक अभी भी उस मृत स्त्री से लगी है। एक चीख रही है, पुकार रही है। एक रोते-रोते सो गयी है, उसके आंसू उसकी आंखों के पास सूख गए हैं–तीन छोटी जुड़वां बच्चियां और स्त्री मर गयी है, और कोई देखने वाला नहीं है। पति पहले मर चुका है। परिवार में और कोई भी नहीं है। इन तीन छोटी बच्चियों का क्या होगा?


उस देवदूत को यह खयाल आ गया, तो वह खाली हाथ वापस लौट गया। उसने जा कर अपने प्रधान को कहा कि मैं न ला सका, मुझे क्षमा करें, लेकिन आपको स्थिति का पता ही नहीं है। तीन जुड़वां बच्चियां हैं– छोटी-छोटी, दूध पीती। एक अभी भी मृत से लगी है, एक रोते-रोते सो गयी है, दूसरी अभी चीख-पुकार रही है। हृदय मेरा ला न सका। क्या यह नहीं हो सकता कि इस स्त्री को कुछ दिन और जीवन के दे दिए जाएं? कम से कम लड़कियां थोड़ी बड़ी हो जाएं। और कोई देखने वाला नहीं है।


मृत्यु के देवता ने कहा, तो तू फिर समझदार हो गया; उससे ज्यादा,..... जिसकी मर्जी से मौत होती है, .......जिसकी मर्जी से जीवन होता है!


    तो तूने पहला पाप कर दिया, और इसकी तुझे सजा मिलेगी। और सजा यह है कि तुझे पृथ्वी पर चले जाना पड़ेगा। और जब तक तू तीन बार न हंस लेगा अपनी मूर्खता पर, तब तक वापस न आ सकेगा।


इसे थोड़ा समझना। तीन बार न हंस लेगा अपनी मूर्खता पर–क्योंकि दूसरे की मूर्खता पर तो अहंकार हंसता है। जब तुम अपनी मूर्खता पर हंसते हो तब अहंकार टूटता है।


 देवदूत को लगा नहीं। वह राजी हो गया दंड भोगने को, लेकिन फिर भी उसे लगा कि सही तो मैं ही हूं। और हंसने का मौका कैसे आएगा? 


उसे रूस की जमीन पर फेंक दिया गया। 


एक चमार, सर्दियों के दिन करीब आ रहे थे और बच्चों के लिए कोट और कंबल खरीदने शहर गया था, कुछ रुपए इकट्ठे कर के। जब वह शहर जा रहा था तो उसने राह के किनारे एक नंगे आदमी को पड़े हुए, ठिठुरते हुए देखा।


 यह नंगा आदमी वही देवदूत है जो पृथ्वी पर फेंक दिया गया था।


 उस चमार को दया आ गयी। और बजाय अपने बच्चों के लिए कपड़े खरीदने के, उसने इस आदमी के लिए कंबल और कपड़े खरीद लिए।


 इस आदमी को कुछ खाने- पीने को भी न था, घर भी न था, छप्पर भी न था जहां रुक सके। तो चमार ने कहा कि अब तुम मेरे साथ ही आ जाओ। लेकिन अगर मेरी पत्नी नाराज हो–जो कि वह निश्चित होगी, क्योंकि बच्चों के लिए कपड़े खरीदने लाया था, वह पैसे तो खर्च हो गए–वह अगर नाराज हो, चिल्लाए, तो तुम परेशान मत होना। थोड़े दिन में सब ठीक हो जाएगा।


उस देवदूत को ले कर चमार घर लौटा। न तो चमार को पता है कि देवदूत घर में आ रहा है, न पत्नी को पता है। जैसे ही देवदूत को ले कर चमार घर में पहुंचा, पत्नी एकदम पागल हो गयी। बहुत नाराज हुई, बहुत चीखी- चिल्लायी। और देवदूत पहली दफा हंसा। चमार ने उससे कहा, हंसते हो, बात क्या है? उसने कहा, मैं जब तीन बार हंस लूंगा तब बता दूंगा।


देवदूत हंसा पहली बार, क्योंकि उसने देखा कि इस पत्नी को पता ही नहीं है कि चमार देवदूत को घर में ले आया है, जिसके आते ही घर में हजारों खुशियां आ जाएंगी। लेकिन आदमी देख ही कितनी दूर तक सकता है! पत्नी तो इतना ही देख पा रही है कि एक कंबल और बच्चों के पकड़े नहीं बचे। जो खो गया है वह देख पा रही है, जो मिला है उसका उसे अंदाज ही नहीं है–मुफ्त! घर में देवदूत आ गया है। जिसके आते ही हजारों खुशियों कश्रो,नंंक्या घट रहा है!


जल्दी ही, क्योंकि वह देवदूत था, सात दिन में ही उसने चमार का सब काम सीख लिया। और उसके जूते इतने प्रसिद्ध हो गए कि चमार महीनों के भीतर धनी होने लगा। आधा साल होते-होते तो उसकी ख्याति सारे लोक में पहुंच गयी कि उस जैसा जूते बनाने वाला कोई भी नहीं, क्योंकि वह जूते देवदूत बनाता था। सम्राटों के जूते वहां बनने लगे। धन अपरंपार बरसने लगा। एक दिन सम्राट का आदमी आया। और उसने कहा कि यह चमड़ा बहुत कीमती है, आसानी से मिलता नहीं, कोई भूल-चूक नहीं करना। जूते ठीक इस तरह के बनने हैं। और ध्यान रखना जूते बनाने हैं, स्लीपर नहीं। क्योंकि रूस में जब कोई आदमी मर जाता है तब उसको स्लीपर पहना कर मरघट तक ले जाते हैं। चमार ने भी देवदूत को कहा कि स्लीपर मत बना देना। जूते बनाने हैं, स्पष्ट आज्ञा है, और चमड़ा इतना ही है। अगर गड़बड़ हो गयी तो हम मुसीबत में फंसेंगे।


 लेकिन फिर भी देवदूत ने स्लीपर ही बनाए। 


जब चमार ने देखे कि स्लीपर बने हैं तो वह क्रोध से आगबबूला हो गया। वह लकड़ी उठा कर उसको मारने को तैयार हो गया कि तू हमारी फांसी लगवा देगा! और तुझे बार-बार कहा था कि स्लीपर बनाने ही नहीं हैं, फिर स्लीपर किसलिए? देवदूत फिर खिलखिला कर हंसा।


 तभी आदमी सम्राट के घर से भागा हुआ आया। उसने कहा, जूते मत बनाना, स्लीपर बनाना। क्योंकि सम्राट की मृत्यु हो गयी है।


भविष्य अज्ञात है। सिवाय उसके और किसी को ज्ञात नहीं। और आदमी तो अतीत के आधार पर निर्णय लेता है। सम्राट जिंदा था तो जूते चाहिए थे, मर गया तो स्लीपर पर चाहिए।


 तब वह चमार उसके पैर पकड़ कर माफी मांगने लगा कि मुझे माफ कर दे, मैंने तुझे मारा। पर उसने कहा, कोई हर्ज नहीं। मैं अपना दंड भोग रहा हूं। लेकिन वह हंसा आज दुबारा। चमार ने फिर पूछा कि हंसी का कारण? उसने कहा कि जब मैं तीन बार हंस लूं…।


दुबारा हंसा इसलिए कि भविष्य हमें ज्ञात नहीं है। इसलिए हम आकांक्षाएं करते हैं जो कि व्यर्थ हैं। हम अभीप्साएं करते हैं जो कभी पूरी न होंगी। हम मांगते हैं जो कभी नहीं घटेगा। क्योंकि कुछ और ही घटना तय है। हमसे बिना पूछे हमारी नियति घूम रही है। और हम व्यर्थ ही बीच में शोरगुल मचाते हैं। चाहिए स्लीपर और हम जूते बनवाते हैं। मरने का वक्त करीब आ रहा है और जिंदगी का हम आयोजन करते हैं। तो देवदूत को लगा कि वे बच्चियां! मुझे क्या पता, भविष्य उनका क्या होने वाला है? मैं नाहक बीच में आया।


और तीसरी घटना घटी कि एक दिन तीन लड़कियां आयीं जवान। उन तीनों की शादी हो रही थी। और उन तीनों ने जूतों के आर्डर दिए कि उनके लिए जूते बनाए जाएं। एक बूढ़ी महिला उनके साथ आयी थी जो बड़ी धनी थी। देवदूत पहचान गया, ये वे ही तीन लड़कियां हैं, जिनको वह मृत मां के पास छोड़ गया था और जिनकी वजह से वह दंड भोग रहा है। वे सब स्वस्थ हैं, सुंदर हैं। उसने पूछा कि क्या हुआ? यह बूढ़ी औरत कौन है? उस बूढ़ी औरत ने कहा कि ये मेरी पड़ोसिन की लड़कियां हैं। गरीब औरत थी, उसके शरीर में दूध भी न था। उसके पास पैसे-लत्ते भी नहीं थे। और तीन बच्चे जुड़वां। वह इन्हीं को दूध पिलाते-पिलाते मर गयी। लेकिन मुझे दया आ गयी, मेरे कोई बच्चे नहीं हैं, और मैंने इन तीनों बच्चियों को

पाल लिया।


 अगर मां जिंदा रहती तो ये तीनों बच्चियां गरीबी, भूख और दीनता और दरिद्रता में बड़ी होतीं। मां मर गयी, इसलिए ये बच्चियां तीनों बहुत बड़े धन-वैभव में, संपदा में पलीं। और अब उस बूढ़ी की सारी संपदा की ये ही तीन मालिक हैं। और इनका सम्राट के परिवार में विवाह हो

रहा है।


देवदूत तीसरी बार हंसा। और चमार को उसने कहा कि ये तीन कारण हैं। भूल मेरी थी। नियति बड़ी है। और हम उतना ही देख पाते हैं, जितना देख पाते हैं। जो नहीं देख पाते, बहुत विस्तार है उसका। और हम जो देख पाते हैं उससे हम कोई अंदाज नहीं लगा सकते, जो होने वाला है, जो होगा। मैं अपनी मूर्खता पर तीन बार हंस लिया हूं। अब मेरा दंड पूरा हो गया और अब मैं जाता हूं।


तुम अगर अपने को बीच में लाना बंद कर दो, तो तुम्हें मार्गों का मार्ग मिल गया। फिर असंख्य मार्गों की चिंता न करनी पड़ेगी। 


         छोड़ दो उस पर। वह जो करवा रहा है, जो उसने अब तक करवाया है, उसके लिए धन्यवाद। जो अभी करवा रहा है, उसके लिए धन्यवाद। जो वह कल करवाएगा, उसके लिए धन्यवाद। तुम बिना लिखा चेक धन्यवाद का उसे दे दो। वह जो भी हो, तुम्हारे धन्यवाद में कोई फर्क न पड़ेगा। अच्छा लगे, बुरा लगे, लोग भला कहें, बुरा कहें, लोगों को दिखायी पड़े दुर्भाग्य या सौभाग्य, यह सब चिंता तुम मत करना।     

🙏

Saturday, 27 September 2025

जीवन में उपयोगी नियम


*🔹जीवन में उपयोगी नियम🔹*


*🔸1. अश्लील पुस्तक आदि न पढ़कर ज्ञानवर्धक पुस्तकों का अध्ययन करना चाहिए ।*


*🔸2. चोरी कभी न करो ।*


*🔸3. किसी की भी वस्तु लें तो उसे सँभाल कर रखो । कार्य पूरा हो फिर तुरन्त ही वापिस दे दो ।*


*🔸4. समय का महत्त्व समझो । व्यर्थ बातें, व्यर्थ काम में समय न गँवाओ । नियमित तथा समय पर काम करो ।*


*🔸5. स्वावलंबी बनो । इससे मनोबल बढ़ता है ।*


*🔸6. हमेशा सच बोलो । किसी की लालच या धमकी में आकर झूठ का आश्रय न लो ।*


*🔸7. अपने से छोटे दुर्बल बालकों को अथवा किसी को भी कभी सताओ मत । हो सके उतनी सबकी मदद करो ।*


*🔸8. अपने मन के गुलाम नहीं परन्तु मन के स्वामी बनो । तुच्छ इच्छाओं की पूर्ति के लिए कभी स्वार्थी न बनो ।*


*🔸9. किसी का तिरस्कार, उपेक्षा, हँसी-मजाक कभी न करो । किसी की निंदा न करो और न सुनो ।*


*🔸10. किसी भी व्यक्ति, परिस्थिति या मुश्किल से कभी न डरो परन्तु हिम्मत से उसका सामना करो ।*


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🙏

Wednesday, 24 September 2025

कर्ज मुक्ति का उपाय

*🔅 शीघ्र कर्जमुक्ति के उपाय 🔅* 


*🔸 जब तक आपका कर्जा पूर्ण समाप्त न हो जाय तब तक नियमितरूप से 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' इस मंत्र का मन-ही-मन जप करते हुए पीपल-वृक्ष को जल अर्पित करें और उसकी गीली मिट्टी से तिलक करें। इससे आप शीघ्र कर्ज-मुक्त होंगे ।*


*🔸 यदि आपके व्यवसाय में कारीगर अथवा नौकर हैं तो उन्हें महीने में एक बार अवश्य अपने घर का भोजन इस भाव से खिलायें कि 'सभी रूपों में भगवान हैं, आज हम इन रूपों में विराजित भगवान को भोग अर्पण कर रहे हैं।' ऐसा करने से आपके व्यवसाय में हमेशा भगवान की कृपा बनी रहेगी। आपके सहयोगी पूरे जी- जान से कार्य में लगे रहेंगे, जिससे केवल कर्ज का चुकाना ही नहीं अपितु बरकत लाना भी आसान हो जायेगा। हर महीने नहीं कर सकते तो विशेष अवसरों पर ही करें।*

Thursday, 21 August 2025

पेड़ का रहस्य

ઝાડનું રહસ્ય

એક માણસ એક બહુરાષ્ટ્રીય કંપનીમાં સેલ્સ મેનેજર તરીકે કામ કરતો હતો. તેણે પોતાની બચતથી શહેરની બહાર એક આલીશાન ઘર બનાવ્યું. શહેરની બહાર હોવાથી, તે વિસ્તાર થોડો ઉજ્જડ હતો.

તે માણસ તેની પત્ની અને બાળકો સાથે તેના નવા ઘરમાં રહેવા લાગ્યો. તે સવારે વહેલા કામ પર નીકળી જતો અને સાંજે મોડો પાછો ફરતો.

એક ઉજ્જડ જગ્યાએ આટલું વૈભવી ઘર જોઈને, ચોરોના એક જૂથે ત્યાં ચોરી કરવાની યોજના બનાવી. ચોરી કરતા પહેલા, તેઓ મેનેજરના ઘરની આસપાસ ગયા અને તેના ઘરની ગતિવિધિઓનું નિરીક્ષણ કરવાનું શરૂ કર્યું.

પહેલા જ દિવસે, તેણે મેનેજરનું વિચિત્ર વર્તન જોયું. ઘરે આવ્યા પછી, તેણે સૌથી પહેલું કામ પોતાના બગીચામાં આંબાના ઝાડ પર જઈને પોતાની ઓફિસની બેગમાંથી એક પછી એક વસ્તુઓ કાઢીને ઝાડ પર ક્યાંક મૂકવાનું શરૂ કર્યું.

મેનેજરની પીઠ ચોરો તરફ હોવાથી, તેઓ જોઈ શક્યા નહીં કે તેણે તેની બેગમાંથી શું કાઢ્યું અને તેને ઝાડ પર ક્યાં મૂક્યું. તેઓએ અનુમાન લગાવ્યું કે તે કંઈક કિંમતી હશે.

ચોરો મેનેજરના ઘરની નજીક ઓચિંતો છાપો મારીને બેઠા હતા અને અંધારું થવાની રાહ જોતા હતા. રાત્રે જ્યારે ઘરની લાઇટ બંધ થઈ ગઈ, ત્યારે તેમને ખાતરી થઈ કે ઘરમાં બધા સૂઈ ગયા છે.

તેઓ દિવાલ કૂદીને ઘરમાં પ્રવેશ્યા અને સીધા આંબાના ઝાડ પાસે ગયા. પછી સમય બગાડ્યા વિના તેઓએ ત્યાં મેનેજર દ્વારા છુપાવેલી વસ્તુઓ શોધવાનું શરૂ કર્યું. પરંતુ ઘણી શોધખોળ કર્યા પછી પણ તેમને કંઈ મળ્યું નહીં. અંતે, થાકેલા અને થાકેલા, તેઓ પાછા ફર્યા.

બીજા દિવસે તેઓ ફરીથી તે ઘરની નજીક છુપાઈને બેઠા. જ્યારે મેનેજર ઓફિસથી પાછો ફર્યો, ત્યારે ચોરોએ ફરીથી તેમની નજર તેના પર કેન્દ્રિત કરી. પાછલા દિવસની જેમ, તે પહેલા આંબાના ઝાડ પાસે ગયો અને બેગમાંથી કંઈક કાઢીને તેમાં નાખવાનું શરૂ કર્યું. પછી તે ઘરની અંદર ગયો.

તે રાત્રે, ઘરની લાઇટ બંધ કર્યા પછી, ચોરો ફરીથી દિવાલ પર ચઢી ગયા અને આંબાના ઝાડ પર પહોંચ્યા અને મેનેજરે ત્યાં છુપાવેલી વસ્તુઓ શોધવા લાગ્યા. પરંતુ તે દિવસે તેમને કંઈ મળ્યું નહીં.

થોડા દિવસો સુધી તેઓ દરરોજ રાત્રે આંબાના ઝાડ પાસે શોધતા રહ્યા પણ તેમને કંઈ મળ્યું નહીં. તેઓ મૂંઝવણમાં હતા કે મેનેજર ઝાડમાં એવી વસ્તુઓ કેવી રીતે છુપાવે છે કે અમારા જેવા હોશિયાર ચોરો પણ તે શોધી શકતા નથી. હવે ચોરો ચોરી કરવા કરતાં આ રહસ્ય જાણવા માટે વધુ ઉત્સુક બન્યા.

છેવટે, તેમની જિજ્ઞાસા સંતોષવા માટે, તેઓ બધા રવિવારે મેનેજરને મળવા તેમના ઘરે ગયા. તેઓએ સજ્જનોની જેમ મેનેજરનું સ્વાગત કર્યું.

પછી ચોરોના નેતાએ કહ્યું, "સાહેબ... કૃપા કરીને વાંધો ના લો. હું તમને કંઈક પૂછવા માંગતો હતો. અમે ચોર છીએ. છેલ્લા કેટલાક દિવસોથી અમે તમારા ઘરમાંથી ચોરી કરવાનો પ્રયાસ કરી રહ્યા છીએ. દરરોજ અમે જોઈએ છીએ કે તમે સાંજે ઘરે આવો છો અને આંબાના ઝાડમાં કંઈક મૂકો છો પણ ઘણી કોશિશ કર્યા પછી પણ અમને તે વસ્તુઓ મળી શકી નથી. અમે બધા જાણવા માટે ઉત્સુક છીએ કે તમે ત્યાં એવી વસ્તુઓ કેવી રીતે છુપાવો છો જે તે મળતી નથી?"

ચોરોની વાત સાંભળીને મેનેજર હસ્યો, પછી કહ્યું, "અરે ભાઈ... હું ત્યાં કંઈ છુપાવતો નથી. તમે લોકો ગેરસમજ કરી છે."

"ના સાહેબ, અમે તે જોયું છે. દરરોજ સાંજે તમે તમારી બેગમાંથી કંઈક કાઢો છો અને તેને ઝાડ પર મુકો છો. તમે હંમેશા ત્યાં કંઈક છુપાવો છો." ચોરોએ એક સ્વરમાં કહ્યું.

હવે મેનેજર ગંભીર બન્યા અને કહ્યું, "હું એક બહુરાષ્ટ્રીય કંપનીમાં સેલ્સ મેનેજર છું. કામનું દબાણ ખૂબ વધારે છે. જેના કારણે તણાવ અનિવાર્ય છે. કોઈપણ કિંમતે લક્ષ્ય પ્રાપ્ત કરવું પડશે. આ માટે, દરરોજ કોઈને કોઈ સાથે ઝઘડો થાય છે. તમારે ગ્રાહકના ટોણા સાંભળવા પડે છે, બોસની ઠપકો સહન કરવો પડે છે. માનસિક તણાવ એટલો બધો છે કે ઘરે આવીને પણ તે દૂર થતો નથી. પહેલા, મારા પરિવારના સભ્યો ઘણીવાર બિનજરૂરી રીતે મારો તણાવ સહન કરતા હતા."

થોડા સમય પછી, મેનેજરે આગળ કહ્યું, “….જ્યારે મેં આ નવું ઘર બનાવ્યું, ત્યારે મેં વિચાર્યું કે હું આ ઘરનું વાતાવરણ શાંતિપૂર્ણ રાખીશ. હું ક્યારેય ઓફિસનો તણાવ ઘરે નહીં લાવીશ. તેથી જ ઘરે આવ્યા પછી, હું સૌથી પહેલું કામ આંબાના ઝાડ પર જાઉં છું અને મારો બધો તણાવ એક પછી એક ત્યાં મૂકી દઉં છું. આશ્ચર્યજનક વાત એ છે કે બીજા દિવસે જ્યારે હું તેને લેવા જાઉં છું, ત્યારે અડધો તણાવ અદૃશ્ય થઈ જાય છે. જે થોડું બચે છે, તે હું મારી સાથે લઈ જાઉં છું. પણ પછી જ્યારે હું સાંજે ઘરે આવું છું, ત્યારે હું ઝાડ પાસે તણાવ છોડી દઉં છું, આ ઝાડનું રહસ્ય છે.”

મેનેજરની વાત સાંભળ્યા પછી, ચોરો ઝાડનું રહસ્ય સમજી ગયા. તેઓ ચોરી કરવામાં સફળ ન થઈ શક્યા, પરંતુ તેઓએ જીવનનો એક ખૂબ જ મહત્વપૂર્ણ પાઠ ચોક્કસપણે શીખ્યા.

શિક્ષણ:-

મિત્રો! આજના યુગમાં, આરામ અને સુવિધાના સાધનો વધી રહ્યા છે અને જીવન આરામદાયક બની રહ્યું છે. પરંતુ ક્યાંકને ક્યાંક તણાવ પણ વધી રહ્યો છે. ઘણીવાર તમે જોયું હશે કે લોકો તેમના કામના તણાવને તેમના ઘરે લાવે છે. આ રીતે, તેઓ ઘરે શાંતિથી રહી શકતા નથી, અને તેમના તણાવથી તેમના પરિવારના સભ્યોને પણ પ્રભાવિત કરે છે. શું હંમેશા તણાવનો ભાર વહન કરવો જરૂરી છે? શું આ રીતે જીવન વધુ મુશ્કેલ નથી બની રહ્યું? તણાવ સંપૂર્ણપણે દૂર કરી શકાતો નથી. પરંતુ ઓછામાં ઓછું જ્યારે તમે ઘરે પરિવારના સભ્યો સાથે હોવ છો, ત્યારે તણાવને દૂર રાખી શકાય છે અને તેમની સાથે ખુશીની ક્ષણો વિતાવી શકાય છે. તેથી, જ્યારે પણ તમે ઘરે આવો છો, ત્યારે તણાવને બહાર છોડી દો.

Friday, 1 August 2025

मनोरंजन

 यदि आप पति हो और कभी एकदम सुबह 4.00 बजे जाग जाओ, और चाय पीने की इच्छा हो जाए, जो कि......स्वाभाविक है,‌ तो आप सोचेंगे कि.....चाय खुद ही बनाऊं या प्रिय अर्धांगिनी को जगाने का दुःसाहस करूँ.....? दोनो ही स्थितियों में आपको निम्नलिखित भयंकर परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है... और आप कुछ भी करो, आपको..."चार बातें"...तो सुननी ही है, जो ‌कि वास्तव में 40-50 कम नहीं होती हैं...!!

...

...

● पहली परिस्थिति:---

आपने खुद ही चाय बनाई...!!


आपने यदि खुद चाय बना ली, तो सुबह-सुबह ब्रह्म- मुहूर्त में आठ बजे जब भार्या जागेगी तब, आपको सुनना ही है:----  


क्या ज़रूरत थी खुद बनाने की, मुझे जगा देते, पूरी पतीली "जला कर", रख दी, और वह "दूध की पतीली" थी, "चाय वाली" नीचे रखी है "दाल भरकर"....!!

...

...

विश्लेषण:---- ‌चाय खुद बनाने से पत्नी दुखी हुई / शर्मिंदा हुई / अपने अधिकार क्षेत्र में घुसपैठ से भयाक्रांत हुई / या कुछ और, आप कभी भी समझ नहीं पाएंगे, दूसरा ये कि......"दूध की पतीली" में "चाय" बनाना तो गुनाह है, लेकिन "चाय की पतीली" में "दाल" भरकर रखी जा सकती है....??

...

...

● दूसरी परिस्थिति:---

आपने पत्नि चाय बनाने के लिए जगा दिया...!!


यदि आपने गलती से भी पत्नी को जगा दिया तो, आप सुनने के लिए तैयार रहिये:---- ‌"मेरी तो किस्मत ही ख़राब है, एक काम नहीं आता इस आदमी को, पिताजी ने जाने क्या देखा था, आधी रात को चाय चाहिए इन्हे....अभी अभी तो, पीठ सीधी की थी और इनकी फरमाइशें हैं कि, ख़त्म ही नहीं हो रही हैं, दिन देखते हैं, न रात....?? चाय बनकर, पी कर ख़त्म भी हो जाएगी पर 'श्लोक-सरिता' का प्रवाह अनवरत, अविरल चालता ही रहेगा...!!

...

...

● तीसरी परिस्थिति:---

एक अन्य विचित्र परिस्थिति....!!


यदि आप चाय खुद बना रहे हैं.......और शक्कर के डिब्बे में शक्कर आधा चम्मच बची है, तो आपके दिमाग में विचार आएगा ही कि बड़े डिब्बे से निकालकर इसमें टॉप-अप कर देता हूँ, यदि आपने ऐसा किया तो पता है क्या सुनोगे....?? शायद आप सोच रहे होंगे कि, आपने बहुत शाबाशी वाला काम कीया, नहीं बल्कि आपको....शर्तिया ये सुनना पड़ेगा -- "किसने कहा था शक्कर निकालने को ? मुझे वह डिब्बा, आज मँजवाना था"

...

...


निष्कर्ष:---- संसार में पत्नी की नजरों में पति नाम का जो जीव होता है, उसमे अकल का बिल्कुल ही अभाव होता है...!! "सर्व-गुण-संपन्न"......तो उसके "पापा" होते हैं, और या फिर "प्रतापगढ-वाले-जीजाजी"....???


इसलिए सभी पतिओं को, मेरी सलाह है कि, कभी सुबह-सुबह नींद खुल जाए, तो वापस मुंह ढांक कर सो जाएं, उसी में भलाई है...!! 😀 😀

प्रार्थना की शक्ति

एक बेटी ने एक संत से आग्रह किया कि वो हमारे घर आकर उसके बीमार पिता से मिलें, प्रार्थना करें। बेटी ने यह भी बताया कि उसके बुजुर्ग पिता पलंग से उठ भी नहीं सकते। 

संत ने बेटी के आग्रह को स्वीकार किया।

कुछ समय बाद जब संत घर आए, तो उसके पिताजी पलंग पर दो तकियों पर सिर रखकर लेटे हुए थे और एक खाली कुर्सी पलंग के साथ पड़ी थी।

संत ने सोचा कि शायद मेरे आने की वजह से यह कुर्सी यहां पहले से ही रख दी गई हो।

संत ने पूछा - मुझे लगता है कि आप मेरे ही आने की उम्मीद कर रहे थे, पिता- नहीं, आप कौन हैं?

संत ने अपना परिचय दिया और फिर कहा- मुझे यह खाली कुर्सी देखकर लगा कि आपको मेरे आने का आभास था।

पिता- ओह यह बात नहीं है, आपको अगर बुरा न लगे तो कृपया कमरे का दरवाजा बंद करेंगे क्या? संत को यह सुनकर थोड़ी हैरत हुई, फिर भी दरवाजा बंद कर दिया।

पिता- दरअसल इस खाली कुर्सी का राज मैंने आज तक किसी को भी नहीं बताया, अपनी बेटी को भी नहीं। पूरी जिंदगी, मैं यह जान नहीं सका कि प्रार्थना कैसे की जाती है।

मंदिर जाता था, पुजारी के श्लोक सुनता था, वो तो सिर के ऊपर से गुज़र जाते थे, कुछ भी पल्ले नहीं पड़ता था।

मैंने फिर प्रार्थना की कोशिश करना छोड़ दिया।

लेकिन चार साल पहले मेरा एक दोस्त मिला उसने मुझे बताया कि प्रार्थना कुछ नहीं, भगवान से सीधे संवाद का माध्यम होती है, उसी ने सलाह दी कि एक खाली कुर्सी अपने सामने रखो, फिर विश्वास करो कि वहाँ भगवान खुद ही विराजमान हैं अब भगवान से ठीक वैसे ही बात करना शुरू करो, जैसे कि अभी तुम मुझसे कर रहे हो।

मैंने ऐसा ही करके देखा, मुझे बहुत अच्छा लगा, फिर तो मैं रोज दो-दो घंटे ऐसा करके देखने लगा, लेकिन यह ध्यान रखता था कि मेरी बेटी कभी मुझे ऐसा करते न देख ले।

अगर वह देख लेती, तो परेशान हो जाती या वह फिर मुझे मनोचिकित्सक के पास ले जाती। यह सब सुनकर संत ने बुजुर्ग के लिए प्रार्थना की, सिर पर हाथ रखा और भगवान से बात करने के क्रम को जारी रखने के लिए कहा। संत को उसी दिन दो दिन के लिए शहर से बाहर जाना था, इसलिए विदा लेकर चले गए। दो दिन बाद बेटी का फोन संत के पास आया कि उसके पिता की उसी दिन कुछ घंटे बाद ही मृत्यु हो गई थी, जिस दिन पिताजी आपसे मिले थे। संत ने पूछा कि उन्हें प्राण छोड़ते वक्त कोई तकलीफ तो नहीं हुई?

बेटी ने जवाब दिया- नहीं, मैं जब घर से काम पर जा रही थी, तो उन्होंने मुझे बुलाया, मेरा माथा प्यार से चूमा, यह सब करते हुए उनके चेहरे पर ऐसी शांति थी, जो मैंने पहले कभी नहीं देखी थी। जब मैं वापस आई, तो वो हमेशा के लिए आंखें मूंद चुके थे, लेकिन मैंने एक अजीब सी चीज भी देखी। पिताजी ऐसी मुद्रा में थे जैसे कि खाली कुर्सी पर किसी की गोद में अपना सिर झुकाए हों। संतजी, वो क्या था?

यह सुनकर संत की आंखों से आंसू बह निकले, बड़ी मुश्किल से बोल पाए - काश, मैं भी जब दुनियां से जाऊं तो ऐसे ही जाऊं। बेटी! तुम्हारे पिताजी की मृत्यु भगवान की गोद में हुई है। उनका सीधा सम्बन्ध सीधे भगवान से था। उनके पास जो खाली कुर्सी थी, उसमें भगवान बैठते थे और वे सीधे उनसे बात करते थे। उनकी प्रार्थना में इतनी ताकत थी कि भगवान को उनके पास आना पड़ता था।

Wednesday, 23 July 2025

आत्म मंथन

 🎊🎊🎊🎊🎊 आत्ममंथन 🎊🎊🎊🎊🎊🎊


              *सभी के लिए उत्कृष्ट संदेश ..*


यात्रियों से भरी बस चली जा रहा थी, जब अचानक मौसम बदला और भारी बारिश चालू हो गयी और बिजली भी चारों तरफ चमकने लगी ।


सभी देख रहे थे कि बिजली कभी भी बस को चपेट में ले सकती है ।


रोशनी से बचने के 2 या 3 कठिन  प्रयास के बाद, चालक ने पेड़ से पचास फुट की दूरी पर बस बंद कर कहा -


"हमारे पास बस में कोई है जिसकी मृत्यु आज निश्चित है।"


उस व्यक्ति की वजह से बाकी सब लोग आज भी मारे जाएंगे।


अब ध्यान से सुनिये जो मैं कह रहा हूं ..


मैं चाहता हूं कि प्रत्येक व्यक्ति बस से उतर एक एक कर बाहर जाकर पेड़ के तने को स्पर्श करे और वापस आ जाए।


"जिसकी मौत निश्चित है वह बिजली से पकड़ा जाएगा और मर जाएगा और बाकी सभी को बचा लिया जाएगा "।


उसने पहले व्यक्ति को जाने और पेड़ को छूने और वापस आने के लिये कहा ।


वह अनिच्छा से बस से उतर गया और पेड़ को छुआ।


उसका दिल प्रसन्न हो गया जब कुछ भी नहीं हुआ और वह अभी भी जीवित था।


यही क्रम बाकी यात्रियों के लिए जारी रहा और उन सभी को राहत मिली जब वे पेड़ को छु कर लौटे और कुछ भी नहीं हुआ।


लेकिन जब आखिरी यात्री की बारी आई, तो सभी उसे आँखों से घूरने लगे ।


वह यात्री बहुत डर गया और अनिच्छुक था क्योंकि वही केवल  अकेला बचा था।


सभी ने उसे नीचे उतरने और जाने और पेड़ को छूने के लिए मजबूर किया।


मृत्यु के 100% भय के साथ, अंतिम यात्री पेड़ के पास गया और उसे छुआ।


उसी समय वहाँ गड़गड़ाहट की एक बड़ी आवाज़ गूँजी और बिजली ने बस को चपेट में ले लिया - हां, बिजली के चपेट में आने से बस के अंदर सभी मारे गये।


इस घटना से यह स्पष्ट हो गया   ( मानना पडेगा ) कि पूरी बस इस आखिरी यात्री की उपस्थिति के कारण सुरक्षित थी ।


उपरोक्त से सीख ..


*कई बार, हम अपनी वर्तमान उपलब्धियों के लिए स्वयं श्रेय लेने की कोशिश करते हैं, लेकिन यह भूल जाते हैं कि यह हमारे साथ जूडे एक व्यक्ति के कारण है।शायद उस व्यक्ति की वजह से हम अपनी वर्तमान खुशी, सम्मान, प्रेम, नाम, प्रसिद्धि, वित्तीय सहायता, शक्ति, स्थिति और क्या नहीं आनंद ले रहे हैं।*


अपने चारों ओर देखिए - शायद आपके माता-पिता, आपके पति या पत्नी, आपके बच्चे, आपके भाई-बहन, आपके मित्र आदि के रूप में आपके आस-पास कोई है, जो आपको नुकसान से बचा रहे हैं ..!


*इसके बारे में सोचिये .. और उस आत्मा को धन्यवाद दें...*

Wednesday, 2 July 2025

वर्षाऋतु में सावधानियां


वर्षा ऋतु में स्वास्थ्यप्रदायक अनमोल कुंजिया

1. वर्षा ऋतु में मंदाग्नि, वायुप्रकोप, पित्त का संचय आदि दोषों की अधिकता होती है । इस ऋतु में भोजन आवश्यकता से थोड़ा कम करोगे तो आम (कच्चा रस) तथा वायु नहीं बनेंगे या कम बनेंगे, स्वास्थ्य अच्छा रहेगा । भूल से भी थोड़ा ज्यादा खाया तो ये दोष कुपित होकर बीमारी का रूप ले सकते हैं ।

2.काजू, बादाम, मावा, मिठाइयाँ भूलकर भी न खायें, इनसे बुखार और दूसरी बीमारियाँ होती हैं ।*

3. अशुद्ध पानी पियेंगे तो पेचिश व और कई बीमारियाँ हो जाती हैं । अगर दस्त हो गये हों तो खिचड़ी में देशी गाय का घी डाल के खा लो तो दस्त बंद हो जाते हैं । पतले दस्त ज्यादा समय तक न रहें इसका ध्यान रखें ।

4. बरसाती मौसम के उत्तरकाल में पित्त प्रकुपित होता है इसलिए खट्टी व तीखी चीजों का सेवन वर्जित है ।

5. जिन्होंने बेपरवाही से बरसात में हवाएँ खायी हैं और शरीर भिगाया है, उनको बुढ़ापे में वायुजन्य तकलीफों के दुःखों से टकराना पड़ता है ।

6. इस ऋतु में खुले बदन घूमना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है ।

7. बारिश के पानी में सिर भिगाने से अभी नहीं तो 20 वर्षों के बाद भी सिरदर्द की पीड़ा अथवा घुटनों का दर्द या वायु संबंधी रोग हो सकते हैं ।

8. जो जवानी में ही धूप में सिर ढकने की सावधानी रखते हैं उनको बुढ़ापे में आँखों की तकलीफें जल्दी नहीं होतीं तथा कान, नाक आदि निरोग रहते हैं ।

9. बदहजमी के कारण अम्लपित्त (Hyper acidity) की समस्या होती है और बदहजमी से जो वायु ऊपर चढ़ती है उससे भी छाती में पीड़ा होती है । वायु और पित्त का प्रकोप होता है तो अनजान लोग उसे हृदयाघात (Heart Attack) मान लेते हैं, डर जाते हैं । इसमें डरें नहीं, 50 ग्राम जीरा सेंक लो व 50 ग्राम सौंफ सेंक लो तथा 20-25 ग्राम काला नमक लो और तीनों को कूटकर चूर्ण बना के घर में रख दो । ऐसा कुछ हो अथवा पेट भारी हो तो गुनगुने पानी से 5-7 ग्राम फाँक लो ।

10. अनुलोम-विलोम प्राणायाम करो – दायें नथुने से श्वास लो, बायें से छोड़ो फिर बायें से लो और दायें से छोड़ो । ऐसा 10 बार करो । दोनों नथुनों से श्वास समान रूप से चलने लगेगा । फिर दायें नथुने से श्वास लिया और 1 से सवा मिनट या सुखपूर्वक जितना रोक सकें अंदर रोका, फिर बायें से छोड़ दिया । कितना भी अजीर्ण, अम्लपित्त, मंदाग्नि, वायु हो, उनकी कमर टूट जायेगी । 5 से ज्यादा प्राणायाम नहीं करना । अगर गर्मी हो जाय तो फिर नहीं करना या कम करना ।

Tuesday, 10 June 2025

નણદ અને ભાભી વચ્ચે નો પ્રેમ

નણદ અને ભાભીનો પ્રેમ......

 ભાભી, મને તારી ગુલાબી સાડી જોઈએ છે, આ મારા મિત્રના લગ્ન છે".

જ્યારે રાધિકાની ભાભી સાક્ષીએ રાધિકાને આ વાત કહી, ત્યારે રાધિકાએ કહ્યું, "આમાં પૂછવાનું શું છે! કબાટ ખુલ્લું છે, જઈને લઈ આવ."

પછી સાક્ષી તેણીએ કહ્યું, "ભાભી, તમારે પણ મેકઅપ કરવો પડશે." રાધિકાએ હસતાં હસતાં કહ્યું.

"ઠીક છે, એ ઠીક છે" અને પોતાના ભૂતકાળમાં પાછી ફરી ગઈ.

રાધિકાના બે મોટા ભાઈઓ હતા. તેમના લગ્ન થઈ ગયા, પણ તેમની ભાભીઓ ક્યારેય રાધિકાને પ્રેમ કરતી નહોતી અને

 તે તેની માતા સાથે પણ સારો વ્યવહાર કરતી નહોતી.

રાધિકાએ ફક્ત એક વાર તેની ભાભી પાસે બેગ માંગી હતી, અને તેણે તેનું અપમાન કરીને કહ્યું હતું કે, "તું આટલી મોંઘી બેગને લાયક નથી, મને આ મારા માતાપિતાના ઘરેથી મળી છે." રાધિકાના ભાઈનો પગાર પણ ખૂબ સારો હતો, ઘરમાં કોઈ કમી નહોતી, રાધિકાના પિતા પાસે પણ ખૂબ સારી નોકરી હતી. પરંતુ ભાભીઓને રાધિકા પસંદ નહોતી કારણ કે રાધિકા તેના ભાઈઓની પ્રિય હતી. પણ તે ખૂબ જ બુદ્ધિશાળી હતી, તેણે ક્યારેય તેના ભાઈને તેની ભાભી વિશે ફરિયાદ નહોતી કરી. રાધિકામાં ખૂબ જ સારા સંસ્કારો હતા, તે સંબંધો બનાવવામાં માનતી હતી

રાધિકાના લગ્ન ખૂબ જ સારા પરિવારમાં થયા હતા, રાધિકાના લગ્ન ખૂબ જ ધામધૂમથી ઉજવવામાં આવ્યા હતા. તેના માતાપિતાએ કોઈ કસર છોડી ન હતી. તેનો પતિ નીરજ એક એન્જિનિયર હતો અને ખૂબ જ સમૃદ્ધ પરિવારનો હતો.

રાધિકા તેની ભાભી સાક્ષીને ખૂબ પ્રેમ કરતી હતી, ક્યારેક તે બંને તેની બહેન બની ગઈ તો ક્યારેક તેની મિત્ર. તેની સાસુ રાધિકાના વર્તનથી ખુશ હતી અને તેને એ વાતનો પણ સંતોષ હતો કે જો તેની વહુ સારી હશે, તો તેની દીકરીનું માતૃત્વ હંમેશા રહેશે. 

રાધિકા તેના સાસરિયામાં ખૂબ ખુશ હતી અને તેના સાસરિયાઓ પણ તેના વર્તનથી ખૂબ ખુશ હતા, રાધિકાએ બધાનું દિલ જીતી લીધું હતું.

લગ્નના બે મહિના પછી, રાધિકાનો જન્મદિવસ હતો, તેથી નીરજે તેને ખૂબ જ સુંદર ગુલાબી સાડી અને હીરાની વીંટી ભેટમાં આપી. 

સાસુ અને સસરાએ પણ ભેટો આપી. રાધિકાનો જન્મદિવસ ખૂબ જ સારી રીતે ઉજવવામાં આવ્યો, રાધિકાના મામાના ઘરેથી પણ બધા આવ્યા.

સાક્ષીના મિત્રના લગ્ન હતા તેથી સાક્ષી પણ એ જ ગુલાબી સાડી પહેરવા માંગતી હતી. જ્યારે તેણીએ પૂછ્યું ત્યારે રાધિકાએ કહ્યું કે પૂછવાનો શું અર્થ છે. રાધિકાએ સાક્ષીને પોતાના હાથે સાડી પહેરાવી અને તેનો મેકઅપ કર્યો. સાક્ષી ખુશ હતી અને રાધિકાના સાસુ ખૂબ ખુશ હતા.

સાક્ષી ઘરની બહાર નીકળવા જતી હતી ત્યારે રાધિકાની ભાભી તેના ભાઈના લગ્નનું કાર્ડ આપવા આવી અને જ્યારે તેણે સાક્ષીને ગુલાબી સાડી પહેરેલી જોઈ, ત્યારે તેણે રાધિકાને બાજુ પર લઈ જઈને કહ્યું, "આ સાડી તારા પતિએ ભેટમાં આપી છે, તેં તારી ભાભીને કેમ આપી?"

પછી રાધિકાએ કહ્યું, "ભાભી, સંબંધો આવા જ હોય છે. પ્રેમ વસ્તુઓ માટે નહીં પણ પ્રિયજનો માટે હોય છે. સાક્ષી સાડી પહેરે તો તે ઘસાઈ જશે નહીં. સાક્ષીનું હૃદય ખુશ થશે. જો તે ખુશ હશે તો હું ખુશ છું. અહીં, તે તમારું કે મારું નથી, દરેકને સમાન અધિકાર છે." 

આજે વાત સાડીની છે, ભલે મારે મારા ઘરેણાં આપવા પડે, હું ચોક્કસ આપીશ કારણ કે અહીં પ્રેમની કોઈ કમી નથી. હું સંબંધ જાળવી રાખવા માંગુ છું.

સાક્ષીને કોઈ પણ વસ્તુની કમી નથી, તેના માતા-પિતા અને ભાઈ સક્ષમ છે, તે ફક્ત તેની ભાભી અને ભાભી વચ્ચેનો પ્રેમ છે."

ભાભી ચૂપ થઈ ગઈ, પણ નીરજ અને સાસુ ખૂબ ખુશ હતા કારણ કે રાધિકાનો અવાજ 

તે તેમના સુધી પણ પહોંચી રહ્યું હતું.

Tuesday, 25 March 2025

ऐसे व्यक्ति चिरंजीवी होता है

🌷 जन्मदिन पर चिरंजीवी होने का प्रयोग🌷

🎇 जन्मदिवस पर दूध (१० ग्राम), गुड़ (१ ग्राम), काले तिल (१ चुटकी) का मिश्रण करके चिरंजीवियों (हनुमानजी, भीष्म पितामह, अश्वथामा, मार्कंडेय, परशुराम, विभीषण, कृपाचार्य और बलि) का आवाहन करके उसका आचमन करने वाला व्यक्ति चिरंजीवी होता है ।

Monday, 24 March 2025

અવકાશયાત્રી

 *‼️શું તમને લાગે છે કે તમારી યોજનાઓ સફળ ન થઈ?*


*સુનિતા વિલિયમ્સ અને બેરી વિલ્મોરે વિચાર્યું કે તેઓ ફક્ત 8 દિવસ માટે અવકાશમાં જશે.*


*તેઓ ત્યાં 286 દિવસ રહ્યા.*


*તેઓ ખરેખર અવકાશમાં ફસાયેલા હતા.*


*‼️કલ્પના કરો:*

👉🏾 *તમે ટૂંકી સફર માટે પેક કરો છો, પરંતુ તેના બદલે, તમે લગભગ એક વર્ષ માટે ગયા છો.*


👉🏾 *તાજી હવા નથી. વાસ્તવિક ખોરાક નથી. કોઈ રસ્તો નથી, ફક્ત અવકાશના ખાલી જગ્યામાં રાહ જોઈ રહ્યા છીએ.*


👉🏾 *તમે ક્યારે ઘરે પાછા ફરશો (અથવા તો પણ) તેનો કોઈ સ્પષ્ટ જવાબ નથી.*


*અને અહીં આપણે ધીરજ ગુમાવી રહ્યા છીએ જ્યારે:*

- *10 મિનિટનો ટ્રાફિક જામ આપણો દિવસ બગાડે છે.*

- *સોદો થોડા દિવસો/મહિનાઓ માટે વિલંબિત થાય છે.*

- *એક અસ્વીકાર ઇમેઇલ આપણને છોડી દેવાનું મન કરાવે છે.*


*તે અવકાશયાત્રીઓનો તેમની પરિસ્થિતિ પર કોઈ નિયંત્રણ નહોતો. તેઓ ફક્ત પરત ફ્લાઇટ બુક કરી શકતા ન હતા. તેમને અનિશ્ચિતતાના 286 દિવસ સુધી સ્વીકારવું પડ્યું, અનુકૂલન કરવું પડ્યું, શાંત રહેવું પડ્યું અને પ્રક્રિયા પર વિશ્વાસ કરવો પડ્યો.*


*અને તેઓ સફળ થયા.*


*જો તે ધીરજ, સહનશક્તિ અને સમસ્યાનું નિરાકરણનો અંતિમ પાઠ નથી, તો મને ખબર નથી કે તે શું છે.*


*ફક્ત ટકી રહેવા માટે નહીં પણ ઇતિહાસ રચવા બદલ આ દંતકથાઓને 🫡સલામ.*


*આગલી વખતે જ્યારે જીવન આપણા પર અણધાર્યા વિલંબ ફેંકે છે, ત્યારે યાદ રાખો:*


*ઓછામાં ઓછું આપણે અવકાશમાં ફસાયેલા નથી.*

गृह के समीपस्थ वृक्ष



*🔹गृह के समीपस्थ वृक्ष 🔹* 


*🔸 ईशान में आँवला शुभदायक है ।*

*🔸 ईशान - पूर्व में कटहल एवं आम शुभदायक हैं ।*


*🔸 (३) घरके पास काँटेवाले, दूधवाले तथा फलवाले वृक्ष स्त्री और सन्तान की हानि करनेवाले हैं । यदि इन्हें काटा न जा सके तो इनके पास शुभ वृक्ष लगा दें ।*


*🔸 काँटेवाले वृक्ष शत्रु से भय देनेवाले, दूधवाले वृक्ष धनका नाश करनेवाले और फलवाले वृक्ष सन्तानका नाश करनेवाले हैं । इनकी लकड़ी भी घरमें नहीं लगानी चाहिये-*


*आसन्नाः कण्टकिनो रिपुभयदाः क्षीरिणोऽर्थनाशाय ।*

*फलिनः प्रजाक्षयकरा दारूण्यपि वर्जयेदेषाम् ॥*

*(बृहत्संहिता ५३। ८६)* 


*(४) बदरी कदली चैव दाडिमी बीजपूरिका।*


*प्ररोहन्ति गृहे यत्र तद्गृहं न प्ररोहति ॥*


*🔸 (समरांगणसूत्रधार ३८ । १३१) 'बेर, केला, अनार तथा नींबू जिस घरमें उगते हैं, उस घर की वृद्धि नहीं होती । '*


*🔸 अश्वत्थं च कदम्बं च कदलीबीजपूरकम् । गृहे यस्य प्ररोहन्ति स गृही न प्ररोहति ॥*


*🔸 (बृहद्दैवज्ञ० ८७ ९) 'पीपल, कदम्ब, केला, बीजू नींबू ये जिस घरमें होते हैं, उसमें रहनेवाले की वंशवृद्धि नहीं होती ।'*


*🔸 (५) घर के भीतर लगायी हुई तुलसी मनुष्यों के लिये कल्याणकारिणी, धन-पुत्र प्रदान करनेवाली, पुण्यदायिनी तथा हरिभक्ति देनेवाली होती है । प्रातःकाल तुलसीका दर्शन करनेसे सुवर्ण दानका फल प्राप्त होता है ।*


*(ब्रह्मवैवर्तपुराण, कृष्ण० १०३ । ६२-६३ )*


*_Ref-_*

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Saturday, 15 February 2025

Satsang 14.2.2025

 15/02/2025

14 फरवरी विशेष सत्र के कुछ अंश 

भाग 1

आपकी किस शब्द में प्रशंसा करो धन्यवाद करूं क्या करूं ऐसे कार्य का भार आपको बार-बार मिले परीहित के काम करने से जो भार पड़ा है वह भार भगवान करे आपको बार-बार मिले. मातृ पितृ पूजन दिवस से जो देवी कार्य कर रहे हो, ऐसा भार है तो ऐसा भार है तो ऐसा भार आप खूब करो आपको क्या बोलूं मेरे पास शब्द नहीं. मैंने यह माता-पिता पूजन दिवस की कैसेट कितनी बार देखा उसकी गिनती नहीं. जब जब देखता हूं मेरा मन द्रवित होता है. ह्रदय का अंधकार मिटता है गुरु भक्ति की इतनी भारी महिमा है. मेरे सतगुरु ने जो काम बताया, उसमें अपने हाथ बटाया, इसलिए आपको धन्यवाद

 चाहे जम्मू वाला हो चाहे मुंबई वाला, सबका नाम नहीं ले सकते, लेकिन भगवान करे सबको भगवान का ज्ञान मिल जाए भगवान की भक्ति मिल जाए


 हंसते खेलते किसी भी काम को जो करें, जैसे सुशील राजकुमार खेलकूद का काम बड़े उत्साह से करता है, वैसे हम राजकुमारों के राजकुमार सर्वे सर्वा है दीदार बाजी हरि राजी


यह बात में फिर से दोहराता हूं. तुलसीदास जी ने कहा..हरि ब्यापक सर्बत्र समाना। प्रेम तें प्रगट होहिं मैं जाना॥        देस काल दिसि बिदिसिहु माहीं। कहहु सो कहाँ जहाँ प्रभु नाहीं॥


सच्चिदानंद हरि को अगर प्रकट करना है तो प्रेम से प्रकट कर सकते हो. सब जगह प्रेम होता है लेकिन हरी से प्रेम नहीं होता. अपने को हरी का मानो प्रेम हो जाता है. अपने को आत्मा मानो. संसार न रहे प्रलय हो जाए फिर भी कोई है, उसको जानने वाला कौन है. वह अंतर्यामी हरि अपना आत्मा है


 तबीयत 19-20 चल रही है, मलेरिया के 6 साइड इफेक्ट कोरोना के सात. यह बीमारियां मुझ में कहीं नहीं है, मैं दुखी हूं यह मन में होता है, मैं दुख को सुख को जानने वाला हूं, अपने आप हर परिस्थिति का बाप तो क्या करोगे हरि हरि ओम ओम हरि हरि ओम ओम


 कितने जगह सब सुन रहे होंगे. सबके हृदय में जो बस रहे हैं वह मेरा सच्चिदानंद. मातृ पितृ पूजन दिवस पर क्या हुआ आपने देखा होगा. एक मेरा छोटा संकल्प था लेकिन मेरे प्यारों ने पूरे विश्व में फैलाया मैं सच में आपको भाग्यशाली मानता हूं हूँ

 लेकिन अपने आप को कम भाग्यशाली नहीं मानता

 मातृ पितृ पूजन दिवस विश्व व्यापी होने पर चल पड़ा है


 परहित समधर्म नहीं.. करोल बाग गाजियाबाद..

500 ऑटो रिक्शा पर प्रचार चलाया गाजियाबाद वालों ने दिल्ली को खूब चमकाया. दिल्ली में कितनी जगह पर कार्यक्रम हुए वह गिनती करने जाए तो समय कम पड़े. मातृ पितृ पूजन दिवस 14 फरवरी को पूर्ण होता है ऐसा नहीं है. जिसको जैसा अनुकूल हो वैसे मनाएं. विदेश में भी कई लोग मातृ पितृ पूजन दिवस मनाते हैप्पी होते हैं.

चाहे राजस्थान हो मारवाड़ हो बंगाल हो सब जगह पर यह दृश्य मधुमय अनुभव कराता.. जिन्होंने अभी तक किया नहीं वह देखकर द्रवित हो जाते हैं क्योंकि यह पिक्चर नहीं यहाँ तो सभी के प्यारे भगवान के दुलारे है


 वेदव्यास जी ने मंगलाचरण के श्लोक में कहा है सच्चिदानंद रुपाय जो सत है चित है आनंदरुप है विश्व उत्पत्ति आदि हेतवे विश्व के उत्पत्ति, स्थिती आदि कारण हेतु तापत्रय विनाशाय उस परमात्मा को हम नमस्कार करते हैं, वह सच्चिदानंद दूर नहीं हमारा आत्मा है.


 बचपन सत नहीं बुढ़ापा सत नहीं.. बचपन कई शरीरों में आए लेकिन जिसे दूर नहीं हुवे ऐसा सच्चिदानंद आत्मा उस परमेश्वर को हम प्रणाम करते हैं. सबके अंतरात्मा में जो है उसको मेरा प्रणाम है


 भगवान शिव जी ने वशिष्ठ जी को प्रश्नोत्तरी में परमात्मा कि स्वरूप की जो बात कही, 33 करोड़ देव तत्विक नहीं, ब्रह्माजी भी तत्विकनहीं मैं भी तात्विक नहीं, सबके अंतरात्मा में जो चिदानंद स्वरूप है, उसको मेरा प्रणाम है भगवान शिव जी की क्या नम्रता है. भगवान राम जी श्री कृष्ण..

 मैं लंकापति रावण.. अहंकार में अपने को कर्ता मानते..


 इंद्र के अंतर्यामी को मेरा प्रणाम है कीड़ी के अंतर्यामी को मेरा प्रणाम है कीड़े में छोटा दिखे हाथी में बड़ा

 ओम ओम आनंद


 क्या हाल है मौज में है ना यह कैसा है जादू समझ में ना आया तेरे प्यार में हमको जीना सिखाया ईश्वर को प्यार करो जीना भी सिखाएगा मिलना भी सिखाएगा मिल भी जाएगा.

ओम नमो भगवते वासुदेवाय मम् देवाय आनंद देवाय शिव देवाय मातृ पितृ दिवस का सभी को खूब-खूब स्नेह भगवान करे कि भगवान की प्रीति आपको मिल जाए भगवान करे कि भगवान की तङप आपको मिल जाए इससे बड़ा आशीर्वाद कई है तो बताओ

 नारायण हरि हरि ओम हरि



 कुछ ना कुछ ऐसे काम करते हो सेवा करते हो वह तुम्हारे दिल में प्रकट होना चाहते हैं भैया.. जुड़ते जुड़ते बिछड़ने की नौबत ना आए ऐसे परब्रम्ह परमात्मा से आप जुड़े हुए हो, इस परमात्मा का साक्षात्कार जब हो जाएगा, तब जनम मरण के 84 के चक्कर सब विफल होजाएंगे . एक 84 का चक्कर 200 करोड़ वर्ष का होता है इसलिए वशिष्ठ जी कहते है उनको मेरा प्रणाम है जो इस आत्मज्ञान के रास्ते पर है.


 आध्यात्मिकता तो वैदिक संस्कृति में गजब की है.

 और हमें गर्व है कि ऐसी संस्कृति में हमने जन्म दिया. और पूर्णता का अनुभव करने वाले ऐसे सदगुरु के प्रति हमारा सद्भाव रहा. गुरु के हृदय में जगह मिल गई, तो दिलबर के दिल में जगह मिल गई है


 डोंबिवली समिति धरती के देवी देवता है, एयरपोर्ट से 50 किलोमीटर दूर, रायता आश्रम से 15 किलोमीटर दूर समुद्र की खाड़ी के सामने ऐसा एक आश्रम बनाया शाबाश है तुम्हारे धन को गुरु भक्ति को समाज सेवा को खूब-खूब साधुवाद.. जहां मुंबई जैसी माया नगरी है वह आश्रम खड़ा करना डोंबिवली भाई बहन को खूब-खूब शाबाश क्या जादू हो रहा है डोंबिवली को वैकुंठ धाम बनकर बैठे हैं

 भी जाने का कार्यक्रम है. इंदौर ही पहले आने वाले थे, लेकिन अहमदाबाद से उज्जैन जाने का मन बना है.. उज्जैन से इंदौर.. इंदौर वाले पीछे-पीछे नहीं आना अपनी जगह पर रहना मुझे गरज होगी तो आऊंगा मुझे गरज है तुम्हारे उन्नति की

 तुम्हारे प्रसाद की तुम्हारी चीज वस्तु की आवश्यकता नहीं. उन्नति जो चल रही है उसमें बढ़ोतरी हो यह मेरी गरज है. हमारे गुरुजी को भी बहुत गरज थी. गुरुजी ने युक्ति से कृपा से प्रवृत्ति में लगा दिया यह प्रवृत्ति स्वभाव से अलग है लेकिन यह प्रवृत्ति स्वभाव बन गई


 दान लेना जिसको अच्छा लगता है वह कान खोलके के सुन ले.. पराया धन पराया मन हरने में वैश्या चतुर होती है.. सामने वाला तबाह हो जाता है लेकिन वैश्या की क्या यात्रा होती है उसका वर्णन शास्त्र करता है. जो दान का हड़प करता है, उसकी एक दो पीढीया तबाह हो जाती है, बड़ी तबाही को बुलाना है..


देखो चारों तरफ वृंदा ही वृंदा है, यह वृंदावन बन गया है.. हरि ॐ


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Friday, 14 February 2025

Love quotes

  • As he read, I fell in love the way you fall asleep: slowly, and then all at once.” – John Green
  • “Loved you yesterday, love you still, always have, always will.” – Elaine Davis
  • “I saw that you were perfect, and so I loved you. Then I saw that you were not perfect and I loved you even more.” – Angelita Lim
  • “I love you not only for what you are, but for what I am when I am with you. I love you not only for what you have made of yourself, but for what you are making of me. I love you for the part of me that you bring out.” – Elizabeth Barrett Browning
  • “The real lover is a man who can thrill you by kissing your forehead or smiling into your eyes or just staring into space.” – Marilyn Monroe
  • “In all the world, there is no heart for me like yours. In all the world, there is no love for you like mine.” – Maya Angelou
  • “I’ll be loving you, always with a love that’s true” – Patsy Cline
  • “Thinking of you keeps me awake. Dreaming of you keeps me asleep. Being with you keeps me alive.” – Unknown
  • “I need you like a heart needs a beat.” – One Republic
  • “When I say I love you more, I don’t mean I love you more than you love me. I mean I love you more than the bad days ahead of us, I love you more than any fight we will ever have. I love you more than the distance between us, I love you more than any obstacle that could try and come between us. I love you the most.” – Unknown

Saturday, 1 February 2025

બજેટ 2025

*બજેટ*2025-2026


જે વેપારી ભાઈઓ ના GST નંબર બન છે તે ફરી કોઈ દંડ વગર ચાલુ કરવામાં આવે અને GST દર ઘડાડવામાં આવે.બજાર બેઠું કરવા અને મન્દી નો સામનો કરવા GST દર ઘટાડવો જરૂરી છે.


લોકો ની ચાલુ લોન અને નવી લોન નો વ્યાજદર ઘટાડવામાં આવે 95% લોકો લોન પર જીવે છે.


ખેતી ની જરૂરિયાત વસ્તુ જેવી કે બિયારણ, દવા, ખાતર અને કૃષિ સાધનો પર કિંમત માં ઘટાડો કરો.


નાના વેપારી ને આધારકાર્ડ અને રહેઠાણ પુરાવા સાથે નજીવાદર પર લોન આપો જેથી બજાર ના મોંઘા વ્યાજ ના ભરડા માંથી બહાર નીકળે.


નાની ગાડી ને ટોલ ટેક્સ માંથી મુક્તિ આપો, મોટા વાહનો નો ટોલ માં ઘટાડો કરો.

રોડ પર પોલીસ, GST અને RTO ની લૂંટ, તોડ બાજી બન કરાવો, ખોટા દંડ કર્યા છે એ ઘટાડો લોકો પાસે સરકાર જે ધારી ને બેઠી છે એવા રૂપિયા નથી.ઓનલાઇન ચલણ ફાડવાનું બન કરો બાપા.


જરૂરી ડોક્યુમેન્ટ ના સુધારા માટે એરિયા પ્રમાણે કમિટી બેસાડી સુધારા કરાવો મામલતદાર અને પંચાયત માં લોકો નો સમય અને રૂપિયા બને વેડફાય છે.


ભ્રષ્ટાચાર સામે લાલ આંખ કરો, ગુનેગાર ને નોકરી માંથી બેદખલ કરી જેલ માં પૂરો અને બીજા ને મોકો આપો. એક પટ્ટા વાળો સામાન્ય માણસ પાસે અબજો ની મિલકત છે. ભ્રસ્ટાચારએ દેશ ને ખોખલો કર્યો છે.


કોર્પોરેટર, સરપંચ, ધારાસભ્ય, સંસદ જેવા ચૂંટાયેલા ઉમેદવાર ના કામ તપાસવા કમિટી બેસાડો જો કામ નથી કરતા તો રાજીનામુ લયી બીજા ને મોકો આપો જેથી લોકો નો અને દેશ નો વિકાસ થાય.


ગન્દકી કરનાર ને સજા કરો, દંડ કરો. સફાઈ ને પ્રોત્સાહન આપો. ગંદકી થી લાખો લોકો બીમાર પડી હોસ્પિટલ માં લૂંટાય છે અને મોત ને ભેટે છે.


જે તે કચેરી માં સ્ટાફ ની કમી છે તાત્કાલિક ધોરણે પુરી કરો જેથી લોકો ને હાલાકી નો સામનો ન કરવો પડે. લોકો નો સમય ઘણો બગડે છે. લોકો ધક્કા ખાય છે.


શિક્ષણ પ્રત્યે ધ્યાન આપો. તાત્કાલિક સ્કૂલો ઉભી કરો, ઉચ્ચ ગુણવતા નું શિક્ષણ મફત આપો, પ્રાઇવેટ શિક્ષણ મોંઘુ થયું છે લોકો લૂંટાય છે.ગામડામાં સરકારી શિક્ષકો ને સામાન્ય જ્ઞાન નથી.


દરેક તાલુકા પ્રમાણે સરકારી અધતન હોસ્પિટલ ઉભી કરો અને દરેક જાતના મશીનો આપો. રિપોર્ટ માં લોકો લૂંટાય છે મફત થાય એવુ આયોજન કરાવો.


બાયપાસ રોડ કરી જમીન સંપાદન કરવા કરતા જે તે હાઇવે પર એલિવેટેડ બ્રિજ બનાવી ખેડૂત બચાવો. એમાં ખર્ચ પણ ઘટશે. અને ટ્રાફિક સમસ્યા હળવી બનશે. લોકો ને રોડ, વાહન ના નિયમો સમજાવો.ટ્રાફિક જવાનો ની ભરતી કરો.


બળત્કારી અને ભ્રસ્ટાચારી ને જાહેર મોં ફાંસી આપો જેથી દાખલો બેસે અને સરકારી ખર્ચ અને પૈસા બને નો બચાવ થાય. સામાન્ય અને સીધા લોકો ના રીએક્સન ના નામે વરઘોડા કાઢવાનું બન કરો.


આખા દેશ મોં કાંતો દારૂબન્ધી કરો અથવા આખા દેશ મોથી દારૂબંધી હટાવી લો.દારૂબંધી ના નામે બોર્ડર પર સામાન્ય ગાડી વાહન ચાલકો હેરાન થાય છે.


તાલુકા પ્રમાણે જે તે વિસ્તાર માં બેરીકેટો નો અડિંગો બનાવ્યો છે એ કાઢો. વિદેશ માં આંતર રાષ્ટ્રિય બોર્ડર પર પણ આવા કોઈ બેરીકેટો નો અડિંગી નથી. 


એરિયા પ્રમાણે ફરિયાદ પેટીઓ મુકો. જે તે લોકો ને જે તે ફરિયાદ હોય તે સમસ્યા નું સમાધાન લાવો. ગરીબો ના દબાણ ભલે તોડો પણ સામે એમને મકાન બનાવી આપો જેથી બેઘર ના થાય, એમને પણ બાળકો છે પરિવાર છે. એમને રજળતા ન મુકો.


પોલીસ, કલેકટર, ચૂંટણીપંચ, કોર્ટ વગેરે ને રાજકીય હાથો બનવાનું બન કરી નિષ્પક્ષ રહી કામ કરવા દો. દેશ એમનેમ આગળ નહીં આવે. દેશ માં નૈતિકતા ના પાઠ શીખવાડો.


નાના ખેડૂત અને ગરીબ લોકો ને પોતાનું મકાન બનાવવા નજીવા દરે લોન આપી સહાય કરો.


કોઈપણ નવા વાહન ખરીદવા ઓછામાં ઓછું 50% ડાઉનપેમેન્ટ કરો જેથી લોકો કરતા વાહન ન વધે. પ્રાઇવેટ ફાઇનાન્સ પર લગામ લગાવો. ગરીબો અને મધ્યમ વર્ગ લૂંટાય છે.મોબાઈલ tv, ફ્રિજ જેવી કંઝયુમર લોનો આપવાનું બન કરો. લોકો ના સિબિલ બગાડી ખોટા દંડ વસુલે છે.


મોટા પગાર દાર કર્મચારી ના પગાર કાપી સામાન્ય જેવા કે પોલીસ હેડકોસ્ટેબલ, પટાવાળા, સરકારી ડ્રાઈવર, st બસ ડ્રાઈવર અને અન્ય ખાતા ના નાના માણસ ના પગાર વધારો જે બિલકુલ ઓછા છે જે ઘર ચલાવવા સક્ષમ નથી.


બઁકો ના નિયમ માં ફેરફાર કરાવો. Tds ના નિયમ હટાવો. બઁકો નો સમય વધારો. દેશ તો ડિજિટલ પેમેન્ટ કર્યો પણ એ બધું સાચવવા સમય વધારો. 6 દિવસ બઁક સવારે 8 થી સાંજે 7 વાગ્યાં સુધી કરો. લોકો ને સ્ટેટમેન્ટ મફત કાઢી આપો.મિનિમમ બેલેન્સ 1000 રાખો. બઁકો લોકો ને લૂંટે છે.


સરકાર ને વિનતી કે સામાન્ય, ગરીબ અને મધ્યમ વર્ગ નું ધ્યાન રાખો, લોકો પીડાય છે એમની પર જુલ્મ મત કરો. દયાભાવ રાખો. આ દેશ ના જ નાગરિકો છે લોકો ની કોરોના કાળ પછી હાલત કફોડી બની છે.સરકારી કર્મચારી સામે લાલ આંખ રાખો.


જય હિન્દ. 🇮🇳