Thursday, 31 October 2024

लक्ष्मी जी यहां वित्त बनकर सताती है

जहाँ शराब-कबाब का सेवन, दुर्व्यसन, कलह होता है वहाँ की लक्ष्मी 'वित्त' बनकर सताती है, दुःख और चिंता उत्पन्न करती है { 'विताड़े ते वित्त' (गुजराती) - जो दुःख दे वह है 'वित्त' } । जहाँ लक्ष्मी का धर्मयुक्त उपयोग होता है वहाँ वह महालक्ष्मी होकर नारायण के सुख से सराबोर करती है ।

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