15/02/2025
14 फरवरी विशेष सत्र के कुछ अंश
भाग 1
आपकी किस शब्द में प्रशंसा करो धन्यवाद करूं क्या करूं ऐसे कार्य का भार आपको बार-बार मिले परीहित के काम करने से जो भार पड़ा है वह भार भगवान करे आपको बार-बार मिले. मातृ पितृ पूजन दिवस से जो देवी कार्य कर रहे हो, ऐसा भार है तो ऐसा भार है तो ऐसा भार आप खूब करो आपको क्या बोलूं मेरे पास शब्द नहीं. मैंने यह माता-पिता पूजन दिवस की कैसेट कितनी बार देखा उसकी गिनती नहीं. जब जब देखता हूं मेरा मन द्रवित होता है. ह्रदय का अंधकार मिटता है गुरु भक्ति की इतनी भारी महिमा है. मेरे सतगुरु ने जो काम बताया, उसमें अपने हाथ बटाया, इसलिए आपको धन्यवाद
चाहे जम्मू वाला हो चाहे मुंबई वाला, सबका नाम नहीं ले सकते, लेकिन भगवान करे सबको भगवान का ज्ञान मिल जाए भगवान की भक्ति मिल जाए
हंसते खेलते किसी भी काम को जो करें, जैसे सुशील राजकुमार खेलकूद का काम बड़े उत्साह से करता है, वैसे हम राजकुमारों के राजकुमार सर्वे सर्वा है दीदार बाजी हरि राजी
यह बात में फिर से दोहराता हूं. तुलसीदास जी ने कहा..हरि ब्यापक सर्बत्र समाना। प्रेम तें प्रगट होहिं मैं जाना॥ देस काल दिसि बिदिसिहु माहीं। कहहु सो कहाँ जहाँ प्रभु नाहीं॥
सच्चिदानंद हरि को अगर प्रकट करना है तो प्रेम से प्रकट कर सकते हो. सब जगह प्रेम होता है लेकिन हरी से प्रेम नहीं होता. अपने को हरी का मानो प्रेम हो जाता है. अपने को आत्मा मानो. संसार न रहे प्रलय हो जाए फिर भी कोई है, उसको जानने वाला कौन है. वह अंतर्यामी हरि अपना आत्मा है
तबीयत 19-20 चल रही है, मलेरिया के 6 साइड इफेक्ट कोरोना के सात. यह बीमारियां मुझ में कहीं नहीं है, मैं दुखी हूं यह मन में होता है, मैं दुख को सुख को जानने वाला हूं, अपने आप हर परिस्थिति का बाप तो क्या करोगे हरि हरि ओम ओम हरि हरि ओम ओम
कितने जगह सब सुन रहे होंगे. सबके हृदय में जो बस रहे हैं वह मेरा सच्चिदानंद. मातृ पितृ पूजन दिवस पर क्या हुआ आपने देखा होगा. एक मेरा छोटा संकल्प था लेकिन मेरे प्यारों ने पूरे विश्व में फैलाया मैं सच में आपको भाग्यशाली मानता हूं हूँ
लेकिन अपने आप को कम भाग्यशाली नहीं मानता
मातृ पितृ पूजन दिवस विश्व व्यापी होने पर चल पड़ा है
परहित समधर्म नहीं.. करोल बाग गाजियाबाद..
500 ऑटो रिक्शा पर प्रचार चलाया गाजियाबाद वालों ने दिल्ली को खूब चमकाया. दिल्ली में कितनी जगह पर कार्यक्रम हुए वह गिनती करने जाए तो समय कम पड़े. मातृ पितृ पूजन दिवस 14 फरवरी को पूर्ण होता है ऐसा नहीं है. जिसको जैसा अनुकूल हो वैसे मनाएं. विदेश में भी कई लोग मातृ पितृ पूजन दिवस मनाते हैप्पी होते हैं.
चाहे राजस्थान हो मारवाड़ हो बंगाल हो सब जगह पर यह दृश्य मधुमय अनुभव कराता.. जिन्होंने अभी तक किया नहीं वह देखकर द्रवित हो जाते हैं क्योंकि यह पिक्चर नहीं यहाँ तो सभी के प्यारे भगवान के दुलारे है
वेदव्यास जी ने मंगलाचरण के श्लोक में कहा है सच्चिदानंद रुपाय जो सत है चित है आनंदरुप है विश्व उत्पत्ति आदि हेतवे विश्व के उत्पत्ति, स्थिती आदि कारण हेतु तापत्रय विनाशाय उस परमात्मा को हम नमस्कार करते हैं, वह सच्चिदानंद दूर नहीं हमारा आत्मा है.
बचपन सत नहीं बुढ़ापा सत नहीं.. बचपन कई शरीरों में आए लेकिन जिसे दूर नहीं हुवे ऐसा सच्चिदानंद आत्मा उस परमेश्वर को हम प्रणाम करते हैं. सबके अंतरात्मा में जो है उसको मेरा प्रणाम है
भगवान शिव जी ने वशिष्ठ जी को प्रश्नोत्तरी में परमात्मा कि स्वरूप की जो बात कही, 33 करोड़ देव तत्विक नहीं, ब्रह्माजी भी तत्विकनहीं मैं भी तात्विक नहीं, सबके अंतरात्मा में जो चिदानंद स्वरूप है, उसको मेरा प्रणाम है भगवान शिव जी की क्या नम्रता है. भगवान राम जी श्री कृष्ण..
मैं लंकापति रावण.. अहंकार में अपने को कर्ता मानते..
इंद्र के अंतर्यामी को मेरा प्रणाम है कीड़ी के अंतर्यामी को मेरा प्रणाम है कीड़े में छोटा दिखे हाथी में बड़ा
ओम ओम आनंद
क्या हाल है मौज में है ना यह कैसा है जादू समझ में ना आया तेरे प्यार में हमको जीना सिखाया ईश्वर को प्यार करो जीना भी सिखाएगा मिलना भी सिखाएगा मिल भी जाएगा.
ओम नमो भगवते वासुदेवाय मम् देवाय आनंद देवाय शिव देवाय मातृ पितृ दिवस का सभी को खूब-खूब स्नेह भगवान करे कि भगवान की प्रीति आपको मिल जाए भगवान करे कि भगवान की तङप आपको मिल जाए इससे बड़ा आशीर्वाद कई है तो बताओ
नारायण हरि हरि ओम हरि
कुछ ना कुछ ऐसे काम करते हो सेवा करते हो वह तुम्हारे दिल में प्रकट होना चाहते हैं भैया.. जुड़ते जुड़ते बिछड़ने की नौबत ना आए ऐसे परब्रम्ह परमात्मा से आप जुड़े हुए हो, इस परमात्मा का साक्षात्कार जब हो जाएगा, तब जनम मरण के 84 के चक्कर सब विफल होजाएंगे . एक 84 का चक्कर 200 करोड़ वर्ष का होता है इसलिए वशिष्ठ जी कहते है उनको मेरा प्रणाम है जो इस आत्मज्ञान के रास्ते पर है.
आध्यात्मिकता तो वैदिक संस्कृति में गजब की है.
और हमें गर्व है कि ऐसी संस्कृति में हमने जन्म दिया. और पूर्णता का अनुभव करने वाले ऐसे सदगुरु के प्रति हमारा सद्भाव रहा. गुरु के हृदय में जगह मिल गई, तो दिलबर के दिल में जगह मिल गई है
डोंबिवली समिति धरती के देवी देवता है, एयरपोर्ट से 50 किलोमीटर दूर, रायता आश्रम से 15 किलोमीटर दूर समुद्र की खाड़ी के सामने ऐसा एक आश्रम बनाया शाबाश है तुम्हारे धन को गुरु भक्ति को समाज सेवा को खूब-खूब साधुवाद.. जहां मुंबई जैसी माया नगरी है वह आश्रम खड़ा करना डोंबिवली भाई बहन को खूब-खूब शाबाश क्या जादू हो रहा है डोंबिवली को वैकुंठ धाम बनकर बैठे हैं
भी जाने का कार्यक्रम है. इंदौर ही पहले आने वाले थे, लेकिन अहमदाबाद से उज्जैन जाने का मन बना है.. उज्जैन से इंदौर.. इंदौर वाले पीछे-पीछे नहीं आना अपनी जगह पर रहना मुझे गरज होगी तो आऊंगा मुझे गरज है तुम्हारे उन्नति की
तुम्हारे प्रसाद की तुम्हारी चीज वस्तु की आवश्यकता नहीं. उन्नति जो चल रही है उसमें बढ़ोतरी हो यह मेरी गरज है. हमारे गुरुजी को भी बहुत गरज थी. गुरुजी ने युक्ति से कृपा से प्रवृत्ति में लगा दिया यह प्रवृत्ति स्वभाव से अलग है लेकिन यह प्रवृत्ति स्वभाव बन गई
दान लेना जिसको अच्छा लगता है वह कान खोलके के सुन ले.. पराया धन पराया मन हरने में वैश्या चतुर होती है.. सामने वाला तबाह हो जाता है लेकिन वैश्या की क्या यात्रा होती है उसका वर्णन शास्त्र करता है. जो दान का हड़प करता है, उसकी एक दो पीढीया तबाह हो जाती है, बड़ी तबाही को बुलाना है..
देखो चारों तरफ वृंदा ही वृंदा है, यह वृंदावन बन गया है.. हरि ॐ
🙏🙏🕉️
🙏🙏🕉️.