Friday, 19 December 2025

बरमूडा ट्राय एंगल

बरमूडा ट्रायएंगल समंदर का एक ऐसा रहस्यमय जाल है, जिसके बारे में सुनते ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं। क्या आप जानते हैं कि अटलांटिक महासागर में एक ऐसा इलाका है जहाँ जहाज़ और हवाई जहाज़ अचानक गायब हो जाते हैं। इस जगह को बरमूडा ट्रायएंगल कहा जाता है, जो फ्लोरिडा, बरमूडा और प्यूर्टो रिको के बीच स्थित है।


पिछले कई सालों से यहाँ ऐसी घटनाएं हुई हैं जो किसी जासूसी या थ्रिलर फिल्म से कम नहीं लगतीं। कोई जहाज़ निकला और फिर उसका कभी कोई पता नहीं चला। कोई हवाई जहाज़ उड़ा और फिर हमेशा के लिए इतिहास बन गया।


लेकिन सवाल वही है। आखिर क्यों।


कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि इसके पीछे हैं रोग वेव्स, यानी अचानक उठने वाली बेहद विशाल समुद्री लहरें। ये लहरें इतनी ऊँची होती हैं कि पूरे जहाज़ को एक ही झटके में निगल सकती हैं, और वो भी बिना कोई निशान छोड़े।


काफी समय तक ऐसा माना जाता था कि ये लहरें सिर्फ कल्पना हैं। लेकिन बाद में सेटेलाइट से मिले सबूतों ने साबित कर दिया कि रोग वेव्स सच में होती हैं। और बरमूडा ट्रायएंगल, जहाँ मौसम अक्सर खराब रहता है और समुद्री धाराएं आपस में टकराती हैं, वहाँ ऐसी लहरों का बनना पूरी तरह संभव है।


तो हो सकता है कि ये रहस्यमय गायबियाँ किसी भूत प्रेत या एलियन की वजह से नहीं, बल्कि प्रकृति की बेरहम ताकत की वजह से हो रही हों। फिर भी कुछ सवाल आज भी अनसुलझे हैं।


बरमूडा ट्रायएंगल वो समंदर का रहस्यमयी जाल है जो सदियों से इंसानों को अपनी गिरफ्त में जकड़ता आ रहा है। अटलांटिक महासागर में फ्लोरिडा, बरमूडा द्वीप और प्यूर्टो रिको के बीच फैला ये त्रिकोणीय इलाका, जहाँ जहाज़ और हवाई जहाज़ ऐसे गायब होते हैं जैसे कोई अदृश्य ताकत उन्हें निगल गई हो।


बरमूडा ट्रायएंगल का नाम खास तौर पर 1950 से 1960 के दशक में मशहूर हुआ, जब लेखकों और मीडिया ने इसे डेविल्स ट्रायएंगल कहना शुरू किया। लेकिन इसकी कहानियां इससे भी कहीं पुरानी हैं।


1492 में क्रिस्टोफर कोलंबस ने अपनी समुद्री यात्रा के दौरान यहाँ अजीब घटनाएं दर्ज की थीं। उन्होंने लिखा कि कम्पास अजीब तरह से घूम रहा था और समंदर में रहस्यमयी चमकती रोशनियाँ दिखाई दे रही थीं।


20वीं सदी में ये रहस्य और भी गहरा हो गया।


1945 में फ्लाइट 19 नाम का अमेरिकी नेवी का ट्रेनिंग मिशन निकला। 5 बॉम्बर प्लेन आसमान में थे। रेडियो पर पायलट की आवाज़ आई कि हमारा कम्पास खराब हो गया है और सब कुछ अजीब लग रहा है। इसके बाद वो कभी नहीं मिले।


अगले दिन उन्हें खोजने गया सर्च प्लेन भी गायब हो गया। कुल 14 क्रू मेंबर्स और 13 सर्चर्स। कुल 27 लोग। जैसे हवा में विलीन हो गए।


1918 में USS साइक्लॉप्स नाम का विशाल जहाज़ 306 लोगों के साथ कोयला लेकर निकला। ना कोई SOS सिग्नल मिला, ना कोई मलबा। ये बरमूडा ट्रायएंगल की सबसे बड़ी और रहस्यमयी गुमशुदगी मानी जाती है।


1800 से अब तक 50 से ज्यादा जहाज़ और 20 से ज्यादा हवाई जहाज़ों के गायब होने की बातें दर्ज की जा चुकी हैं। 1967 में विचक्राफ्ट नाम की एक यॉट का सिर्फ 1 लाइफ जैकेट मिला। 1991 में एक इटालियन जहाज़ ने रेडियो पर कहा कि हमारे साथ कुछ भयानक हो रहा है, और फिर सब शांत हो गया।


इसके पीछे सिर्फ रोग वेव्स ही नहीं, और भी कारण बताए जाते हैं।


समंदर की गहराई में मौजूद मीथेन गैस के बुलबुले जब अचानक बाहर निकलते हैं, तो पानी का घनत्व कम हो जाता है। ऐसे में जहाज़ ऐसे डूब जाते हैं जैसे किसी दलदल में फंस गए हों। ये गैस हवाई जहाज़ के इंजन को भी प्रभावित कर सकती है। ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिकों ने इसे प्रयोगशाला में सिमुलेट करके भी दिखाया है।


इस इलाके में मैग्नेटिक गड़बड़ी की भी बातें सामने आई हैं। कम्पास कई बार सही दिशा नहीं दिखाते। यहाँ पृथ्वी की एक खास मैग्नेटिक लाइन गुजरती है, जिसे एगॉनिक लाइन कहा जाता है। अगर पायलट या कैप्टन सतर्क न हो, तो रास्ता भटकना तय है।


इसके अलावा तेज तूफान, घना कोहरा, गल्फ स्ट्रीम जैसी शक्तिशाली समुद्री धाराएं और इंसानी गलतियां भी हादसों की बड़ी वजह मानी जाती हैं। ये इलाका दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री और हवाई रास्तों में से एक है।


कुछ लोग अब भी एटलांटिस, रहस्यमयी ऊर्जा या UFO किडनैपिंग जैसी थ्योरीज़ पर यकीन करते हैं। चार्ल्स बर्लिट्ज की किताब ने इन कहानियों को और मशहूर किया। लेकिन ज़्यादातर वैज्ञानिक इन्हें कल्पना मानते हैं।


US कोस्ट गार्ड और इंश्योरेंस कंपनियों के मुताबिक, इस इलाके में हादसों की दर दुनिया के दूसरे समुद्री इलाकों से ज्यादा नहीं है। 2020 में SS Cotopaxi का मलबा मिला, जो 1925 में गायब हुआ था, लेकिन वो बरमूडा ट्रायएंगल के बाहर था।


तो शायद बरमूडा ट्रायएंगल कोई भूतिया जगह नहीं, बल्कि प्रकृति का एक खौफनाक लेकिन असली खेल है।


फिर भी समंदर का ये इलाका आज भी इंसान को सोचने पर मजबूर कर देता है।


रहस्य कुछ हद तक सुलझा है।

लेकिन रोमांच अब भी ज़िंदा है।

Friday, 12 December 2025

दीप जलाने की अनुमति पर बात

 

कैसे अदालतें हमें न्याय देंगी…?

कौन-सा जज हमारे पक्ष में खड़ा होगा…?


हम इतने कमजोर कब हो गए कि हिंदुओं को दीप जलाने की अनुमति देने वाले जज के खिलाफ महाभियोग लाया जा रहा है, और हम चुप बैठे हैं?


ना शोसल मिडिया पर पोस्ट कर रहे हैं…

ना किसी की पोस्ट को लाइक-रीट्वीट-कमेंट करके उसका साथ दे पा रहे हैं।


आवाज़ भी नहीं उठा पा रहे,

और जो उठा रहे हैं, हम उनके साथ भी खड़े नहीं हो पा रहे।


न्यायमूर्ति जी. आर. स्वामीनाथन पर विपक्ष का महाभियोग प्रस्ताव कई गंभीर सवाल खड़ा करता है।


सिर्फ सात साल में 64,700 से अधिक फैसले देने वाले, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहे गए न्यायाधीश पर अचानक “विचारधारा-प्रेरित” होने का आरोप, क्या यह सिर्फ संयोग है? या फिर विपक्ष की नीयत में ही खोट है?


असल विवाद थिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी पर कार्तिगई दीपम जलाने की अनुमति को लेकर था। सरकार और अदालत का मतभेद, पर विपक्ष ने इसे राजनीतिक लड़ाई में बदल दियाक्या एक धार्मिक परंपरा को निभाने की अनुमति देना इतना बड़ा अपराध है कि जज को संसद में घसीटा जाए?


या फिर विपक्ष अपनी कमजोर होती राजनीतिक ज़मीन को बचाने के लिए न्यायपालिका पर दबाव बनाने में लगा है?