🙏🏻🙏🏻जय श्री सीताराम जी 🙏🏻🙏🏻
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🩸भक्तवर हनुमान और शनि 🩸
शनि ने दुष्टग्रहनिहन्ता महावीर का हाथ पकड़ लिया और उन्हें युद्ध के लिए ललकारने लगे। हनुमान ने झटककर अपना हाथ छुड़ा लिया। युद्ध लोलुप शनि पुनः भक्तवर हनुमान का हाथ पकड़ कर उन्हें युद्ध के लिए खींचने लगे।
'आप नहीं मानेंगे।' धीरे से कहते हुए पिशाच ग्रह घातक कपिवर ने अपनी पूंछ बढ़ा कर शनि को उसमें लपेटना प्रारम्भ किया। कुछ ही क्षण में अविनीत सूर्य पुत्र क्रोधसंरक्तलोचन समीरात्मज की सुदृढ़ पुच्छ में आकण्ठ आबद्ध हो गये। उनका अहंकार, उनकी शक्ति एवं उनका पराक्रम व्यर्थ सिद्ध हुआ। वे सर्वथा अवश, असहाय और निरुपाय होकर दृढ़तम बन्धन की पीड़ा से छटपटा रहे थे।
"अब राम-सेतु की परिक्रमा का समय हो गया।" अञ्जनानन्दन उठे और दौड़ते हुए सेतु की प्रदक्षिणा करने लगे। शनिदेव की सम्पूर्ण शक्ति से भी उनका बन्धन शिथिल न हो सका। भक्तराज हनुमान के दौड़ने से उनकी विशाल पूंछ वानर-भालुओं द्वारा रखे गए शिलाखण्डों पर गिरती जा रही थी। वीरवर हनुमान दौड़ते हुए जान-बूझकर भी अपनी पूंछ शिलाखण्डों पर पटक देते थे।
शनि की बड़ी अद्भुत एवं दयनीय दशा थी। शिलाखण्डों पर पटके जाने से उनका शरीर रक्त से लथपथ हो गया। उनकी पीड़ा की सीमा नहीं थी और उग्रवेग हनुमान की परिक्रमा में कहीं विराम नहीं दीख रहा था।
तब शनि अत्यन्त कातर स्वर में प्रार्थना करने लगे -- 'करुणामय भक्तराज! मुझ पर कृपा कीजिए। अपनी उद्दण्डता का दण्ड मैं पा गया। आप मुझे मुक्त कीजिए। मेरा प्राण छोड़ दीजिए।'
दयामूर्ति हनुमान खड़े हुए। शनि का अङ्ग-प्रत्यङ्ग लहूलुहान हो गया था। असह पीड़ा हो रही थी उनके रग-रग में। विनीतात्मा समीरात्मज ने कहा -- 'यदि तुम मेरे भक्त की राशि पर कभी न जाने का वचन दो तो मैं तुम्हें मुक्त कर सकता हूं और यदि तुमने ऐसा किया तो मैं तुम्हें कठोरतम दण्ड प्रदान करूँगा।'
'सुरवन्दित वीरवर! निश्चय ही मैं आपके भक्त की राशि पर कभी भी नहीं जाऊँगा।' पीड़ा से छटपटाते हुए शनि ने आतुरता से प्रार्थना की --- ' आप कृपापूर्वक मुझे शीघ्र बन्धन मुक्त कर दीजिए।'
शरणागतवत्सल भक्तप्रवर हनुमान ने शनि को छोड़ दिया। शनि ने अपना शरीर सहलाते हुए गर्वापहारी मारुतात्मज के चरणों में सादर प्रणाम किया और वे चोट की असह्य पीड़ा से व्याकुल हो कर अपनी देह पर लगाने के लिए तेल माँगने लगे।
उन्हें जो तेल प्रदान करता, उसे वे संतुष्ट होकर आशिष देते। कहते हैं, इसी कारण अब भी शनिदेव को तेल चढ़ाया जाता है।